दिल्ली में शुरू होगा पहला ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर, कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच होगी आसान

दिल्ली में कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच के लिए पहला पूर्णत: ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर तैयार हो गया है। नंदनगरी डिपो परिसर में बने इस अत्याधुनिक केंद्र में वाहनों की जांच मशीनों और कंप्यूटर आधारित तकनीक से होगी। इससे वाहन चालकों को तेज, पारदर्शी और सटीक फिटनेस जांच सुविधा मिलेगी।

May 18, 2026 - 12:42
 0  3
दिल्ली में शुरू होगा पहला ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर, कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच होगी आसान

UNITED NEWS OF ASIA. दिल्ली के कमर्शियल वाहन चालकों और मालिकों को जल्द बड़ी सुविधा मिलने जा रही है। राजधानी का पहला पूर्णत: ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर (ATS) अब तैयार हो चुका है। इस आधुनिक केंद्र के शुरू होने के बाद कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच पहले की तुलना में अधिक तेज, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सटीक हो सकेगी। यह सेंटर नंदनगरी डिपो परिसर में बनाया गया है और इसके जल्द शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार इस अत्याधुनिक ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर का निर्माण करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यहां कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच पूरी तरह मशीनों और कंप्यूटर आधारित तकनीक के जरिए की जाएगी। वाहन के ब्रेकिंग सिस्टम, सस्पेंशन, हेडलाइट एलाइनमेंट, स्टीयरिंग, अंडरबॉडी और प्रदूषण स्तर जैसी महत्वपूर्ण तकनीकी जांचें स्वचालित तरीके से पूरी होंगी।

अधिकारियों के मुताबिक इस सेंटर में हर साल लगभग 72 हजार वाहनों की फिटनेस और प्रदूषण जांच की जा सकेगी। अभी तक दिल्ली के कई वाहन चालकों को फिटनेस टेस्ट के लिए बाहर जाना पड़ता था, लेकिन नए ATS के शुरू होने से यह परेशानी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

दिल्ली परिवहन निगम द्वारा विकसित इस केंद्र में कुल चार ऑटोमेटिक लेन बनाई गई हैं। इनमें दो लेन भारी वाहनों के लिए निर्धारित की गई हैं, जबकि एक लेन हल्के वाहनों और एक लेन दोपहिया वाहनों के लिए तैयार की गई है। हालांकि फिलहाल दिल्ली में दोपहिया वाहनों की फिटनेस जांच का नियम लागू नहीं है, लेकिन भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसके लिए भी अलग व्यवस्था की गई है।

इस ऑटोमेटेड सेंटर की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यहां वाहनों की जांच कुछ ही मिनटों में पूरी हो सकेगी। अधिकारियों के अनुसार यदि वाहन सभी निर्धारित मानकों पर खरा उतरता है तो लगभग 10 से 12 मिनट के भीतर फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाएगा। वहीं निर्धारित तकनीकी मानकों को पूरा नहीं करने वाले वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा।

ऑटोमेटेड टेस्टिंग सिस्टम के जरिए मानवीय भूल और पक्षपात की संभावना भी लगभग समाप्त हो जाएगी। कंप्यूटर और सेंसर आधारित जांच के कारण वाहन के छोटे से छोटे तकनीकी दोष का भी पता लगाया जा सकेगा। इससे फिटनेस प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आधुनिक टेस्टिंग सेंटर सड़क सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे। तकनीकी रूप से खराब वाहनों की पहचान होने से सड़क हादसों में कमी आने की संभावना है। साथ ही प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी।

दिल्ली में शुरू होने वाला यह पहला पूर्णत: ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर भविष्य में देश के अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकता है।