NEET-UG 2026 विवाद: UDF और FAIMA ने NTA भंग करने की उठाई मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

NEET-UG 2026 पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट और FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर NTA को भंग करने और नई वैधानिक परीक्षा एजेंसी बनाने की मांग की है।

May 16, 2026 - 17:21
 0  2
NEET-UG 2026 विवाद: UDF और FAIMA ने NTA भंग करने की उठाई मांग, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

UNITED NEWS OF ASIA. NEET-UG 2026 परीक्षा को लेकर देशभर में विवाद गहराता जा रहा है। पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद अब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। मेडिकल संगठनों और छात्रों के बीच बढ़ते असंतोष के बीच यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर NTA को उसके मौजूदा स्वरूप में भंग करने की मांग की है। इससे पहले फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) भी इसी तरह की मांग उठा चुका है।

याचिका में कहा गया है कि वर्तमान NTA, जिसे सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत गठित किया गया है, लगातार परीक्षा संचालन में विफल साबित हो रही है। NEET-UG 2026 में सामने आए कथित पेपर लीक और व्यवस्थागत खामियों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसी राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षाओं के लिए अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और संवैधानिक ढांचे वाली संस्था की आवश्यकता है।

यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में मांग की है कि संसद के विशेष कानून के जरिए नई वैधानिक राष्ट्रीय परीक्षा संस्था बनाई जाए। संगठन का आरोप है कि NTA की मौजूदा व्यवस्था में कई तकनीकी और प्रशासनिक कमजोरियां हैं, जिनके कारण बार-बार परीक्षा विवाद सामने आ रहे हैं।

FAIMA ने भी सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित की जाए। संगठन का कहना है कि परीक्षा एजेंसी के कामकाज की स्वतंत्र जांच और निगरानी बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। वकील तन्वी दुबे ने कोर्ट में कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बड़े स्तर पर सुधार आवश्यक हैं।

पिछले कुछ वर्षों में NEET परीक्षा लगातार विवादों में रही है। वर्ष 2021, 2024 और अब 2026 में भी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। छात्रों और अभिभावकों का आरोप है कि बार-बार पेपर लीक और गड़बड़ियों से मेहनती विद्यार्थियों का नुकसान हो रहा है। देशभर में सोशल मीडिया और छात्र संगठनों के माध्यम से NTA के खिलाफ विरोध भी तेज हो गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही देश की शिक्षा व्यवस्था पर गहरा असर डालती है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर आने वाला फैसला भविष्य की परीक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल पूरे देश की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई और केंद्र सरकार के रुख पर टिकी हुई है।