TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, ममता बनर्जी बोलीं- जिसे जाना है जाए, पार्टी फिर खड़ी करेंगे
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC में अंदरूनी असंतोष बढ़ता दिख रहा है। पार्टी बैठक में ममता बनर्जी ने साफ कहा कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे स्वतंत्र हैं। उन्होंने जनादेश की लूट का आरोप लगाते हुए कार्यकर्ताओं से पार्टी को फिर मजबूत करने की अपील की।
UNITED NEWS OF ASIA. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों मिली बड़ी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी असंतोष और दलबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने कालीघाट स्थित अपने आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई, जिसमें चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशी और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी भी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान ममता बनर्जी ने पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए साफ संदेश दिया कि जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि वह किसी को जबरन रोकने में विश्वास नहीं करतीं। ममता ने कहा, “जो लोग दूसरी पार्टियों में जाना चाहते हैं, उन्हें जाने दीजिए। मैं पार्टी को फिर से खड़ा करूंगी और और अधिक मजबूत बनाऊंगी।”
ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस कभी झुकेगी नहीं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि जिन पार्टी कार्यालयों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें दोबारा तैयार करें, रंग-रोगन करें और फिर से सक्रिय बनाएं। उन्होंने यहां तक कहा कि जरूरत पड़ी तो वह खुद भी पार्टी कार्यालयों को रंगने का काम करेंगी।
बैठक में ममता बनर्जी ने चुनाव परिणामों को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के जनादेश की लूट हुई है। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी पार्टी या संस्था का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को चुनावी प्रक्रिया और परिणामों पर सवाल उठाने के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, चुनावी हार के बाद TMC के कई नेताओं के भाजपा या अन्य दलों में जाने की अटकलें तेज हो गई हैं। इसी वजह से पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे माहौल में ममता बनर्जी की यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व अब संगठन को दोबारा मजबूत करने और कार्यकर्ताओं का भरोसा कायम रखने की कोशिश में जुट गया है।
इससे पहले भी ममता बनर्जी सार्वजनिक रूप से कह चुकी हैं कि यदि कोई नेता पार्टी छोड़ना चाहता है तो वह स्वतंत्र है। उन्होंने 5 मई को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कहा था कि कई लोग दूसरी पार्टी में जा सकते हैं और उनकी अपनी मजबूरियां हो सकती हैं। उस समय भी उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह किसी को रोकने की राजनीति नहीं करतीं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। चुनावी हार के बाद TMC के सामने सबसे बड़ी चुनौती संगठन को एकजुट रखना और कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना है। वहीं भाजपा इस राजनीतिक स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश में नजर आ रही है। फिलहाल ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वह हार के बाद भी पीछे हटने वाली नहीं हैं और पार्टी को फिर से मजबूती देने के लिए पूरी ताकत से मैदान में उतरेंगी।