सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर विवाद: CJI की ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी से मचा राजनीतिक और सामाजिक बवाल

सुप्रीम कोर्ट में एक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बेरोजगार युवाओं को लेकर दिए गए कथित बयान पर सोशल मीडिया और विभिन्न वर्गों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। मामला एक वकील द्वारा सीनियर एडवोकेट का दर्जा मांगने से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया।

May 15, 2026 - 18:27
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सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर विवाद: CJI की ‘कॉकरोच’ वाली टिप्पणी से मचा राजनीतिक और सामाजिक बवाल

UNITED NEWS OF ASIA. सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की टिप्पणी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक वकील द्वारा खुद को सीनियर एडवोकेट का दर्जा दिए जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत की टिप्पणी सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर चर्चा का विषय बन गई है। कथित तौर पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कुछ बेरोजगार युवाओं की तुलना “कॉकरोच” से करते हुए कहा कि ऐसे लोग बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या RTI एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं।

यह मामला शुक्रवार को CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने आया था। याचिकाकर्ता वकील ने खुद को सीनियर एडवोकेट घोषित करने की मांग की थी। सुनवाई के दौरान बेंच ने याचिकाकर्ता के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि सीनियर एडवोकेट का दर्जा योग्यता और प्रतिष्ठा के आधार पर दिया जाता है, इसे मांगकर हासिल नहीं किया जा सकता।

सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि समाज में पहले से ही कई “पैरासाइट” मौजूद हैं, जो सिस्टम पर हमला करते हैं। अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उसके पास कोई और काम नहीं है और क्या यह किसी वरिष्ठ अधिवक्ता बनने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति का उचित आचरण है। बेंच ने स्पष्ट किया कि केवल योग्यता होने से कोई व्यक्ति स्वतः उस पद का अधिकारी नहीं बन जाता।

कोर्ट ने आगे कहा कि यदि दिल्ली हाईकोर्ट ने किसी को सीनियर एडवोकेट का दर्जा दे भी दिया हो, तो सुप्रीम कोर्ट उसके आचरण के आधार पर उस फैसले की समीक्षा कर सकता है। अदालत ने वकीलों की डिग्री की सत्यता पर भी सवाल उठाए और कहा कि सुप्रीम कोर्ट कुछ मामलों में CBI जांच पर विचार कर सकता है। बेंच ने यह भी टिप्पणी की कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया इस दिशा में सख्त कदम नहीं उठाता क्योंकि उसे चुनाव और वोट की चिंता रहती है।

हालांकि, सुनवाई के अंत में याचिकाकर्ता ने अदालत से माफी मांगते हुए अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद मामला समाप्त हो गया, लेकिन अदालत की टिप्पणियों को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।

कई लोगों ने इस टिप्पणी को बेरोजगार युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के प्रति असंवेदनशील बताया है, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि अदालत ने व्यवस्था के दुरुपयोग और अनावश्यक मुकदमों पर सख्त संदेश देने की कोशिश की है। फिलहाल इस टिप्पणी को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।