ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ CPI का प्रदर्शन, केंद्र सरकार से राहत की मांग

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की छत्तीसगढ़ राज्य परिषद ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों का विरोध करते हुए केंद्र सरकार से तत्काल राहत देने की मांग की है। पार्टी ने महंगाई, बेरोजगारी, निजीकरण और खनन नीतियों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

May 15, 2026 - 17:02
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ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ CPI का प्रदर्शन, केंद्र सरकार से राहत की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. नवीन चौधरी, दंतेवाड़ा l भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की छत्तीसगढ़ राज्य परिषद ने पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की हालिया मूल्य वृद्धि के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया है। पार्टी ने इसे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताते हुए केंद्र सरकार से तुरंत बढ़ी हुई कीमतें वापस लेने की मांग की है। CPI का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के बीच ईंधन कीमतों में इजाफा आम लोगों के जीवन को और अधिक कठिन बना रहा है।

पार्टी द्वारा जारी बयान में कहा गया कि देश में पहले से ही खाद्य वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मजदूर वर्ग, मध्यम वर्ग और गरीब परिवार महंगाई की मार झेल रहे हैं। ऐसे समय में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ाना जनविरोधी फैसला है। CPI नेताओं का कहना है कि इसका सीधा असर परिवहन, रोजमर्रा की वस्तुओं और घरेलू बजट पर पड़ रहा है।

Communist Party of India ने आरोप लगाया कि देश के लघु और मध्यम उद्योग पहले से आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं। बढ़ती लागत और कमजोर बाजार व्यवस्था के कारण छोटे व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं। वहीं मजदूरों की आय महंगाई के अनुपात में नहीं बढ़ रही, जिससे आम परिवारों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।

पार्टी ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के मुद्दे को भी उठाया। बयान में कहा गया कि निजीकरण के कारण गरीब और ग्रामीण वर्ग की पहुंच बुनियादी सुविधाओं तक सीमित होती जा रही है। CPI ने केंद्र सरकार से मांग की कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निजी हाथों में देने की बजाय सार्वजनिक व्यवस्था को मजबूत किया जाए।

इसके साथ ही पार्टी ने खनन नीतियों और प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन पर भी सवाल उठाए। CPI का आरोप है कि स्थानीय समुदायों और आदिवासी वर्गों के विरोध के बावजूद खनन परियोजनाएं बड़े उद्योग समूहों को सौंपी जा रही हैं। इससे जमीन, जंगल और जल स्रोतों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। पार्टी ने कहा कि आदिवासी और स्थानीय समुदायों की सहमति के बिना किसी भी परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

Communist Party of India ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी चिंता जताई। पार्टी का कहना है कि जंगलों की कटाई और पर्यावरणीय असंतुलन का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जल स्रोतों पर पड़ेगा। जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार को सख्त पर्यावरणीय नियम लागू करने चाहिए।

CPI ने अपनी मांगों में ईंधन और रसोई गैस की बढ़ी हुई कीमतों को तत्काल वापस लेने, खनन और प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन पर पुनर्विचार करने, आदिवासी समुदायों की सहमति को प्राथमिकता देने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कठोर कदम उठाने की मांग की है।

पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में आम जनता के मुद्दों को लेकर आवाज उठाती रहेगी। CPI नेताओं ने कहा कि यदि सरकार ने महंगाई और जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखाई तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।