गुंडरदेही में अवैध रेत कारोबार का जाल, तांदुला नदी पर बढ़ता संकट
बालोद जिले के गुंडरदेही क्षेत्र में तांदुला नदी से अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर मिलीभगत और कार्रवाई में लापरवाही के आरोप लगाए हैं। कई गांवों में रातभर ट्रैक्टरों और मशीनों से रेत निकासी की शिकायतें सामने आई हैं। पर्यावरण और जलस्तर पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
UNITED NEWS OF ASA. सुनील साहू l बालोद जिले के गुंडरदेही ब्लॉक में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। तांदुला नदी किनारे बसे कई गांवों में रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर रेत निकासी किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रेत माफिया संगठित तरीके से नदी से रेत निकालकर विभिन्न स्थानों पर भंडारण कर रहे हैं, जबकि प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
जानकारी के अनुसार रंगकटेरा, खुटेरी, सिकोसा, खेरूद, कोदेवा, धनगांव, देवरी (ख) और हीरागुड़ा सहित कई गांवों में अवैध घाट संचालित होने की चर्चा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रात 11 बजे के बाद ट्रैक्टरों की आवाजाही शुरू हो जाती है और सुबह तक लगातार रेत निकासी का काम चलता रहता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह कारोबार अब संगठित नेटवर्क के रूप में फैल चुका है।
सिकोसा, रिंगा कटेरा, लिमोरा, हीरागुड़ा और बघमरा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रेत डंप कर भंडारण किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि कार्रवाई की भनक लगते ही वाहन और मशीनें मौके से हटा दी जाती हैं। इससे खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक कई जगहों पर जेसीबी जैसी भारी मशीनों से खुदाई की जा रही है, जिससे तांदुला नदी का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है। नदी में लगातार हो रही खुदाई से जलस्तर कम होने और जलीय जीव-जंतुओं के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। लोगों का कहना है कि तांदुला नदी तीन जिलों के लिए महत्वपूर्ण जल स्रोत है, लेकिन अवैध खनन के कारण इसका भविष्य खतरे में पड़ता जा रहा है।
क्षेत्र में यह चर्चा भी तेज है कि कुछ स्थानों पर ग्राम विकास समितियों की आड़ में तो कुछ जगह जनप्रतिनिधियों के संरक्षण में यह कारोबार संचालित हो रहा है। सूत्रों के मुताबिक जल्द ही सत्ता पक्ष के एक भाजपा नेता द्वारा भी इस मामले की शिकायत किए जाने की संभावना है। वहीं कई लोगों का मानना है कि इस अवैध कारोबार में आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी सक्रिय हैं, जिसके कारण अधिकारी खुलकर कार्रवाई करने से बच रहे हैं।
सांसद भोजराज नाग की नाराजगी की चर्चा होने के बावजूद अब तक जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब क्षेत्र में स्वीकृत घाटों से सीमित मात्रा में ही रेत निकासी हो रही है और निर्माण कार्य भी सामान्य स्तर पर हैं, तब आखिर इतनी बड़ी मात्रा में निकाली जा रही रेत कहां खप रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।