मुनगाडीह पंचायत में भ्रष्टाचार जांच पर उठे सवाल, समय सीमा बीतने के बाद भी नहीं पहुंची टीम

कोरबा जिले के पाली जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत मुनगाडीह में 15वें वित्त की राशि में कथित भ्रष्टाचार के मामले में जांच आदेश के बावजूद कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है। पंचायत उप संचालक द्वारा तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट मांगे जाने के बाद भी जांच टीम पंचायत नहीं पहुंची। ग्रामीणों ने अधिकारियों पर लापरवाही और दोषियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।

May 18, 2026 - 12:08
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मुनगाडीह पंचायत में भ्रष्टाचार जांच पर उठे सवाल, समय सीमा बीतने के बाद भी नहीं पहुंची टीम

UNITED NEWS OF ASIA.राहुल गुप्ता कोरबा l कोरबा जिले के पाली जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत मुनगाडीह में विकास कार्यों के नाम पर कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करने लगा है। पंचायत में 15वें वित्त आयोग की राशि से कराए गए विभिन्न कार्यों में फर्जी बिलों के जरिए लाखों रुपए के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। मामले में पंचायत उप संचालक द्वारा जांच के आदेश जारी किए जाने के बावजूद अब तक जांच टीम पंचायत नहीं पहुंची है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

जानकारी के अनुसार पंचायत में मिडिल स्कूल शौचालय मरम्मत, प्राथमिक शाला अतिरिक्त कक्ष मरम्मत, नाली सफाई, नाली मरम्मत, पाइप लाइन विस्तार और पेयजल स्रोतों के रखरखाव जैसे कार्यों के नाम पर राशि खर्च दिखाई गई। आरोप है कि कई कार्य केवल कागजों में दर्शाए गए जबकि जमीनी स्तर पर काम नहीं हुआ। इस मामले को स्थानीय स्तर पर उजागर किए जाने के बाद जिला पंचायत सीईओ दिनेश नाग ने मामले को गंभीरता से लिया और पंचायत उप संचालक को जांच के निर्देश दिए।

पंचायत उप संचालक द्वारा पाली जनपद सीईओ मोहनीश देवांगन को 14 मई 2026 को आदेश जारी कर तीन दिन के भीतर जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया था। इसके बावजूद तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी जांच टीम ग्राम पंचायत मुनगाडीह नहीं पहुंची। इससे ग्रामीणों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा जानबूझकर जांच प्रक्रिया को धीमा किया जा रहा है।

ग्रामीणों और विभागीय सूत्रों का आरोप है कि दोषी सरपंच और सचिव को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण दिया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि वरिष्ठ अधिकारियों के स्पष्ट आदेश के बाद भी जांच नहीं होती है तो यह प्रशासनिक उदासीनता और आदेशों की अवहेलना को दर्शाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि समय पर जांच नहीं होने से भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।

मामले को लेकर अब पंचायत स्तर पर असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द जांच शुरू नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो वे कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर आंदोलन करेंगे। लोगों का कहना है कि पंचायतों में विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि का सही उपयोग होना चाहिए, लेकिन भ्रष्टाचार के कारण योजनाओं का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पा रहा है।

प्रशासनिक नियमों के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। ऐसे में अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा या फिर मामला केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा।

ग्रामीणों की नजर अब जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।