जोबट की आंगनवाड़ियों में बड़ा “पोषण घोटाला”, 93 स्वयं सहायता समूहों पर कार्रवाई की तैयारी

आलीराजपुर जिले के जोबट क्षेत्र में आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों और महिलाओं को मिलने वाले पोषण आहार में बड़ी अनियमितता सामने आई है। प्रशासनिक जांच में 93 स्वयं सहायता समूहों की लापरवाही उजागर हुई है। कई केंद्रों पर भोजन वितरण बंद मिला, जबकि रिकॉर्ड में नियमित वितरण दर्शाया गया था।

May 24, 2026 - 12:16
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जोबट की आंगनवाड़ियों में बड़ा “पोषण घोटाला”, 93 स्वयं सहायता समूहों पर कार्रवाई की तैयारी

UNITED NEWS OF ASIA. मुस्तकीम मुगल,  आलीराजपुर l आलीराजपुर जिले के जोबट क्षेत्र से आंगनवाड़ी व्यवस्थाओं में बड़ी अनियमितता और कथित “पोषण घोटाले” का मामला सामने आया है। जिन आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को नियमित रूप से पोषण आहार और नाश्ता उपलब्ध कराया जाना चाहिए था, वहां पिछले एक महीने से कई केंद्रों पर भोजन वितरण पूरी तरह बंद मिला। प्रशासनिक जांच में खुलासा हुआ कि रिकॉर्ड में पोषण आहार वितरण नियमित दर्शाया गया, लेकिन हकीकत में लाभार्थियों तक भोजन पहुंचा ही नहीं।

मामले का खुलासा कलेक्टर Neetu Mathur के निर्देश पर हुआ। एसडीएम वीरेंद्र सिंह बघेल ने जोबट क्षेत्र की आंगनवाड़ियों का औचक निरीक्षण किया, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। निरीक्षण के दौरान कई केंद्रों में पोषण आहार वितरण रजिस्टर अपडेट मिले, लेकिन मौके पर न तो भोजन की व्यवस्था दिखाई दी और न ही रसोई संचालन होता पाया गया।

जांच में कुल 93 स्वयं सहायता समूहों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। आरोप है कि इन समूहों द्वारा बच्चों और महिलाओं को मिलने वाला नाश्ता और पोषण आहार नियमित रूप से वितरित नहीं किया गया। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी 93 समूह संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

निरीक्षण के दौरान ग्राम डेकाकुंड की चार आंगनवाड़ी केंद्र पूरी तरह बंद मिलीं। केंद्रों पर न तो बच्चे मौजूद थे और न ही भोजन वितरण की कोई व्यवस्था दिखाई दी। इससे विभागीय निगरानी और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से कई केंद्रों में व्यवस्थाएं प्रभावित थीं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

प्रशासन ने मामले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार दो आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, दो सहायिका और संबंधित सुपरवाइजर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

यह मामला सामने आने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि एक महीने तक बच्चों और महिलाओं को पोषण आहार नहीं मिला तो विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। इससे स्पष्ट होता है कि निगरानी व्यवस्था में गंभीर कमी रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आंगनवाड़ी केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में पोषण आहार वितरण में अनियमितता सीधे तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य और विकास को प्रभावित करती है। प्रशासन ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं।

जोबट क्षेत्र से सामने आया यह कथित “पोषण घोटाला” अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।