प्रसूति सहायता राशि के नाम पर साइबर ठगी, किसान के खाते से 2.15 लाख रुपये उड़ाए

सिंगरौली जिले के गढ़वा थाना क्षेत्र में एक किसान साइबर ठगी का शिकार हो गया। ठगों ने प्रसूति सहायता योजना की राशि दिलाने और केवाईसी अपडेट कराने का झांसा देकर बैंक खाते से 2.15 लाख रुपये निकाल लिए। पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन 1930 और गढ़वा थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

Jul 8, 2026 - 17:20
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प्रसूति सहायता राशि के नाम पर साइबर ठगी, किसान के खाते से 2.15 लाख रुपये उड़ाए

UNITED NEWS OF ASIA. आदर्श तिवारी, सिंगरौली l मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में साइबर ठगों ने एक किसान को सरकारी प्रसूति सहायता योजना का लाभ दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी कर ली। गढ़वा थाना क्षेत्र के ग्राम रमडीहा निवासी राजेश तिवारी साइबर अपराधियों के जाल में फंस गए और उनके बैंक खाते से करीब 2 लाख 15 हजार रुपये निकाल लिए गए। घटना के बाद पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराते हुए गढ़वा थाने में भी मामला दर्ज कराया है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।

जानकारी के अनुसार राजेश तिवारी के मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। कॉल करने वाले ने स्वयं को संबंधित सरकारी विभाग का कर्मचारी बताया और कहा कि उनकी पत्नी की प्रसूति सहायता योजना की राशि केवाईसी अधूरी होने के कारण खाते में नहीं पहुंच पा रही है। उसने भरोसा दिलाया कि यदि आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर दी जाए तो सहायता राशि तुरंत खाते में जमा हो जाएगी।

ठग ने बातचीत के दौरान बैंक खाते से जुड़ी जानकारी हासिल की। इसके बाद उसने राजेश तिवारी को PhonePe एप खोलकर बैलेंस चेक करने और कुछ प्रक्रिया पूरी करने के लिए कहा। सरकारी योजना का लाभ मिलने की उम्मीद में पीड़ित ने उसकी बातों पर विश्वास कर लिया। इसी दौरान साइबर अपराधियों ने उनके खाते तक पहुंच बनाकर अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से रकम निकालना शुरू कर दिया।

बताया गया कि 27 जून से 30 जून 2026 के बीच कई किस्तों में कुल 2 लाख 15 हजार रुपये खाते से निकाल लिए गए। शुरुआत में पीड़ित को इसकी जानकारी नहीं लगी, लेकिन जब बैंक खाते की जांच की गई तो बड़ी रकम गायब होने का पता चला। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

घटना सामने आने के बाद राजेश तिवारी ने तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, ताकि ट्रांजेक्शन को ट्रैक कर रकम को रोका जा सके। साथ ही उन्होंने गढ़वा थाना पहुंचकर लिखित शिकायत भी दी और पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस को सौंपी।

पीड़ित ने पुलिस से मांग की है कि साइबर अपराधियों की जल्द पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए तथा उनके खाते से निकाली गई राशि वापस दिलाई जाए। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर बैंकिंग ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर और डिजिटल भुगतान से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों की जांच शुरू कर दी है।

यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि साइबर ठग अब सरकारी योजनाओं का नाम लेकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। प्रसूति सहायता, किसान सम्मान निधि, पेंशन, केवाईसी अपडेट, बिजली बिल और बैंक खाते से जुड़े बहाने बनाकर लोगों से गोपनीय जानकारी हासिल की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी सरकारी योजना का लाभ दिलाने के नाम पर यदि कोई फोन पर बैंक खाता, ओटीपी, यूपीआई पिन या अन्य निजी जानकारी मांगे तो उसे साझा नहीं करना चाहिए। किसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में देना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।

फिलहाल गढ़वा थाना पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और साइबर अपराधियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।