UNITED NEWS OF ASIA.सुनील कुमार साहू, बालोद। छत्तीसगढ़ शासन की “एक जिला एक उत्पाद” योजना अब किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम बघमरा के युवा किसान आकाश चंद्राकर इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती को छोड़कर अदरक जैसी नकदी फसल को अपनाया और कम समय में अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल की।
आकाश चंद्राकर ने अपने लगभग ढाई एकड़ खेत में अदरक की खेती शुरू की। शुरुआत में यह एक नया प्रयोग था, लेकिन उन्होंने आधुनिक कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों और बेहतर प्रबंधन का सहारा लिया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें अच्छी गुणवत्ता का उत्पादन प्राप्त हुआ। बाजार में अदरक की लगातार बढ़ती मांग के कारण उन्हें उचित दाम भी मिला, जिससे उनकी आमदनी में दोगुना इजाफा हुआ।
इस सफलता के पीछे शासन का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। उद्यानिकी विभाग द्वारा राज्य पोषित मसाला क्षेत्र विस्तार योजना के अंतर्गत आकाश को करीब 49 हजार रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई। इस आर्थिक सहायता से उन्होंने खेती में आधुनिक संसाधनों का उपयोग किया, जिससे उत्पादन लागत कम हुई और मुनाफा बढ़ा।
आकाश चंद्राकर बताते हैं कि अदरक की खेती उनके लिए “समृद्धि का द्वार” साबित हुई है। उनका कहना है कि यदि सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग मिले तो किसान पारंपरिक खेती से हटकर भी बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने अन्य किसानों से भी नई फसलों को अपनाने और योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की है।
बालोद जिले में अदरक को “एक जिला एक उत्पाद” के रूप में चयनित किए जाने के बाद अब कई किसान इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। पारंपरिक धान और अन्य फसलों की तुलना में अदरक जैसी नकदी फसल अधिक लाभदायक साबित हो रही है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है और वे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को न केवल सब्सिडी प्रदान की जा रही है, बल्कि उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इससे खेती अब केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में उभर रही है।
आकाश चंद्राकर की सफलता कहानी यह दर्शाती है कि यदि किसान नई तकनीक और योजनाओं का सही उपयोग करें, तो सीमित संसाधनों में भी बेहतर आय प्राप्त की जा सकती है। उनकी यह पहल न केवल अन्य किसानों के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी साबित करती है कि बदलते समय के साथ खेती के तरीके बदलकर समृद्धि हासिल की जा सकती है।