परसतराई में गोंडवाना महासभा का वार्षिक अधिवेशन, सामाजिक एकता और शिक्षा पर जोर
बालोद जिले के ग्राम परसतराई में आयोजित गोंडवाना गोंड महासभा के वार्षिक अधिवेशन में जनप्रतिनिधियों ने सामाजिक एकता, शिक्षा और मातृशक्ति के महत्व पर बल दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए।
UNITED NEWS OF ASIA. सुनील कुमार साहू, बालोद। बालोद जिले के गुण्डरदेही/अर्जुन्दा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम परसतराई में गोंडवाना गोंड महासभा का वार्षिक अधिवेशन गरिमामय और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना, सामाजिक एकता को सुदृढ़ बनाना और जनजातीय समुदाय के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में गुण्डरदेही विधायक कुंवर सिंह निषाद उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत बालोद की अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर ने की। इस अवसर पर उपाध्यक्ष नीतीश मोंटी यादव, पूर्व जिला पंचायत सदस्य पुष्पेंद्र चंद्राकर, सरपंच गायत्री नेताम, तहसील अध्यक्ष सेवंत मंडावी, उपाध्यक्ष नंदनी नेताम, राजेश्वरी पोटा, टिकेंद्र कोर्राम, परिक्षेत्र अध्यक्ष नरेन्द्र कुमार सिंद्राम और पूर्व सरपंच छबिलाल कोर्राम सहित कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक पदाधिकारी मौजूद रहे।
अधिवेशन को संबोधित करते हुए विधायक कुंवर सिंह निषाद ने गोंडवाना समाज की एकजुटता की सराहना की और कहा कि यह समाज त्याग, तपस्या और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए जाना जाता है। उन्होंने युवाओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने और नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि समाज की असली शक्ति उसकी एकता और संगठन में निहित होती है, इसलिए सभी को मिलकर समाज के विकास के लिए कार्य करना चाहिए।
वहीं जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर ने अपने संबोधन में मातृशक्ति की भूमिका पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति महिलाओं और बच्चों की स्थिति से आंकी जाती है। उन्होंने महिलाओं को सशक्त बनाने और शिक्षा के माध्यम से सामाजिक विकास को गति देने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही उन्होंने गोंडवाना महासभा द्वारा समाज की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने के प्रयासों की सराहना की और ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास तथा सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का संकल्प व्यक्त किया।
अध्यक्ष सेवंत मंडावी ने अपने विचार रखते हुए सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपराओं और पूर्वजों के मूल्यों से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने समाज के लोगों से नशामुक्ति, शिक्षा और सामाजिक ढांचे को मजबूत करने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार बूढ़ादेव की पूजा-अर्चना और सामाजिक ध्वजारोहण के साथ किया गया। इसके पश्चात स्थानीय कलाकारों द्वारा पारंपरिक लोक नृत्यों की रंगारंग प्रस्तुति दी गई, जिसने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। इस अवसर पर मेधावी छात्र-छात्राओं और समाजसेवियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया गया।
अधिवेशन के समापन अवसर पर अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग, माताएं और युवा उपस्थित रहे, जिन्होंने समाज की एकता बनाए रखने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का संकल्प लिया।
कुल मिलाकर यह अधिवेशन सामाजिक जागरूकता, एकजुटता और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सफल रहा, जिसने समाज में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संचार किया।