दिल्ली में बाढ़ से निपटने के लिए ‘जापान मॉडल’ लागू करने की तैयारी, 18 डायवर्जन चैनल बनाए जाएंगे

दिल्ली में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए ‘जापान मॉडल’ पर आधारित नई योजना तैयार की गई है। इसके तहत यमुना नदी के अतिरिक्त पानी को नियंत्रित करने के लिए 18 डायवर्जन चैनल और बड़े स्तर पर जल भंडारण की व्यवस्था की जाएगी।

Apr 5, 2026 - 11:44
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दिल्ली में बाढ़ से निपटने के लिए ‘जापान मॉडल’ लागू करने की तैयारी, 18 डायवर्जन चैनल बनाए जाएंगे

UNITED NEWS OF ASIA.  देश की राजधानी नई दिल्ली में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ और जलभराव की समस्या गंभीर रूप ले लेती है। इस चुनौती से निपटने के लिए अब सरकार ‘जापान मॉडल’ पर आधारित एक नई और व्यापक योजना पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य यमुना नदी के जलस्तर को नियंत्रित करना और शहर को बाढ़ के खतरे से बचाना है।

सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा तैयार की गई इस योजना में फ्लड प्लेन एरिया के भीतर 6 प्रमुख स्थानों की पहचान की गई है। इन स्थानों पर बड़े पैमाने पर जल प्रबंधन की व्यवस्था विकसित की जाएगी, ताकि बाढ़ के समय अतिरिक्त पानी को सुरक्षित रूप से नियंत्रित और संग्रहित किया जा सके।

योजना के अनुसार, करीब 15 माइन पिट्स (गहरे जल भंडारण गड्ढे) तैयार किए जाएंगे। इन पिट्स की कुल भंडारण क्षमता लगभग 5200 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) होगी। इन संरचनाओं में पानी को लगभग 60 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। इससे न केवल बाढ़ के दौरान जलस्तर को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में जल संसाधन के रूप में भी इसका उपयोग किया जा सकेगा।

इसके अलावा, इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जापान की तर्ज पर 18 डायवर्जन चैनलों का निर्माण है। इन चैनलों के जरिए यमुना नदी के अतिरिक्त पानी को अन्य सुरक्षित क्षेत्रों की ओर मोड़ा जाएगा। इससे नदी के किनारे बसे निचले इलाकों में जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जापान जैसे देशों में उन्नत जल प्रबंधन तकनीकों के कारण बाढ़ की स्थिति को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जाता है। उसी तर्ज पर दिल्ली में भी इस मॉडल को अपनाने से बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद है। यह योजना विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए राहत लेकर आएगी, जो हर साल बारिश के मौसम में जलमग्न हो जाते हैं।

पूरी परियोजना के तहत लगभग 4200 मिलियन लीटर पानी को स्टोर करने की व्यवस्था की जा रही है। यह न केवल बाढ़ नियंत्रण में मदद करेगा, बल्कि जल संरक्षण के दृष्टिकोण से भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

यदि यह योजना सफल होती है, तो दिल्ली में बाढ़ और जलभराव की समस्या में काफी कमी आ सकती है। साथ ही, यह देश के अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल के रूप में सामने आ सकती है, जहां हर साल बारिश के कारण इसी तरह की समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

कुल मिलाकर, ‘जापान मॉडल’ पर आधारित यह योजना राजधानी के लिए एक दीर्घकालिक समाधान के रूप में देखी जा रही है, जो बाढ़ प्रबंधन के साथ-साथ जल संरक्षण को भी बढ़ावा देगी।