हिमालय में गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे, चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 18 मई 2026 को वैदिक मंत्रोच्चारण और धार्मिक परंपराओं के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने के साथ ही रुद्रनाथ यात्रा का भी शुभारंभ हो गया है। हिमालय की दुर्गम वादियों में स्थित यह पवित्र धाम भगवान शिव के एकानन स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है।

May 19, 2026 - 14:19
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हिमालय में गूंजे हर-हर महादेव के जयकारे, चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले

UNITED NEWS OF ASIA. राजेश पुरोहित l उत्तराखंड की दिव्य हिमालयी वादियों में स्थित विश्व प्रसिद्ध चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 18 मई 2026 को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने के साथ ही पूरा क्षेत्र “हर-हर महादेव” और “जय बाबा रुद्रनाथ” के जयघोष से भक्तिमय हो उठा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधु-संत और स्थानीय लोग मौजूद रहे। धार्मिक अनुष्ठानों और पारंपरिक पूजा-अर्चना के बीच मंदिर के कपाट खुलने का यह भव्य समारोह श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम बन गया।

श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सदस्य विनीत चन्द्र पोस्ती ने जानकारी देते हुए बताया कि पंचकेदारों में चतुर्थ केदार के रूप में प्रसिद्ध रुद्रनाथ मंदिर में भगवान शिव के ‘एकानन स्वरूप’ यानी मुख रूप की पूजा की जाती है। हिमालय की दुर्गम चोटियों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा, प्राकृतिक सुंदरता और रहस्यमयी वातावरण के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

कपाट खुलने के साथ अब आगामी छह माह तक यहां नियमित पूजा-अर्चना, धार्मिक अनुष्ठान और विशेष आरतियां आयोजित की जाएंगी। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय मार्गों को पार कर इस दिव्य धाम तक पहुंचते हैं और भगवान शिव के दुर्लभ स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार रुद्रनाथ धाम में दर्शन करने से श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा की अनुभूति होती है।

रुद्रनाथ यात्रा अपनी कठिन लेकिन रोमांचकारी ट्रेकिंग के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सड़क मार्ग के साथ लंबा पैदल सफर तय करना पड़ता है। हरिद्वार से ऋषिकेश, देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गोपेश्वर होते हुए सागर गांव तक सड़क मार्ग से पहुंचा जाता है। इसके बाद लगभग 20 से 22 किलोमीटर का ट्रेक कर श्रद्धालु रुद्रनाथ मंदिर पहुंचते हैं। यह ट्रेक घने जंगलों, हरे-भरे बुग्यालों, प्राकृतिक जलधाराओं और हिमालय के मनोरम दृश्यों से होकर गुजरता है, जो यात्रियों को प्रकृति और अध्यात्म के अद्भुत संगम का अनुभव कराता है।

रुद्रनाथ पहुंचने का एक अन्य धार्मिक मार्ग मंडल गांव और अनसूया देवी मंदिर होकर भी जाता है, जिसे कई श्रद्धालु विशेष धार्मिक महत्व के कारण चुनते हैं। हालांकि यह मार्ग अपेक्षाकृत लंबा माना जाता है, लेकिन इसकी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था यात्रियों को विशेष अनुभव प्रदान करती है।

कपाट खुलने के साथ ही इस वर्ष की पवित्र रुद्रनाथ यात्रा का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। प्रशासन और मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गई हैं। आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के रुद्रनाथ धाम पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।