151 किमी ‘सनातनी सोनभद्र परिक्रमा’ का भव्य समापन, बर्दी गढ़ी में उमड़ा जनसैलाब

सिंगरौली जिले में 151 किलोमीटर लंबी ‘सनातनी सोनभद्र परिक्रमा पदयात्रा’ का बर्दी गढ़ी में भव्य समापन हुआ। इस यात्रा ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

Mar 28, 2026 - 13:37
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151 किमी ‘सनातनी सोनभद्र परिक्रमा’ का भव्य समापन, बर्दी गढ़ी में उमड़ा जनसैलाब

UNITED NEWS OF ASIA. आदर्श तिवारी, सिंगरौली।  सिंगरौली जिले में आयोजित 151 किलोमीटर लंबी ‘सनातनी सोनभद्र परिक्रमा पदयात्रा’ का शुक्रवार को चितरंगी क्षेत्र के बर्दी गढ़ी में भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर क्षेत्र में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा और पूरे आयोजन स्थल पर भक्ति, उत्साह और सामाजिक एकता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और प्रकृति संरक्षण के संदेश के साथ निकली इस पदयात्रा ने कई गांवों को जोड़ते हुए समाज में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। समापन के अवसर पर मां बरदेश्वरी देवी की विधिवत पूजा-अर्चना की गई, जिसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन हुआ। इस भंडारे में सैकड़ों श्रद्धालुओं और राहगीरों ने प्रसाद ग्रहण कर आयोजन को सफल बनाया।

यह पदयात्रा दिग्विजय प्रताप सिंह के नेतृत्व में प्रारंभ हुई थी। यात्रा बर्दी से शुरू होकर बिछी, चितावल, क्योटली जैसे कई गांवों से होती हुई मां कुंडवासिनी धाम पहुंची। इसके बाद यह यात्रा कूड़ारी, गढ़वा शिव मंदिर और धरौली कुटी तपोस्थली जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों से गुजरते हुए अपने अंतिम पड़ाव बर्दी गढ़ी पहुंची।

पूरे मार्ग में यात्रा का भव्य स्वागत किया गया। हर गांव में स्थानीय लोगों ने यात्रियों के लिए भोजन, जल और विश्राम की व्यवस्था की। खास बात यह रही कि प्रत्येक गांव से 50 से 100 लोगों की टोली यात्रियों को अगले पड़ाव तक सम्मानपूर्वक पहुंचाने के लिए साथ चलती रही। इससे पूरे क्षेत्र में भक्ति, एकता और सामाजिक समरसता का माहौल बना रहा।

समापन कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में आम नागरिकों की उपस्थिति रही। सभी ने इस आयोजन को सफल बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

पदयात्रा के संयोजक दिग्विजय प्रताप सिंह ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह यात्रा कब और कैसे हंसी-खुशी बीत गई, इसका एहसास ही नहीं हुआ। उन्होंने सोनभद्र नदी के किनारे प्रकृति की सुंदरता को अलौकिक बताते हुए लोगों से अपील की कि वे निस्वार्थ भाव से धर्म और पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आएं।

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण भी हमारी जिम्मेदारी है। पदयात्रा के माध्यम से लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया, जो आज के समय में बेहद आवश्यक है।

कुल मिलाकर, ‘सनातनी सोनभद्र परिक्रमा’ का यह भव्य आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने सामाजिक एकता, सहयोग और पर्यावरण संरक्षण का भी मजबूत संदेश दिया। यह यात्रा आने वाले समय में ऐसे आयोजनों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी।