फाइब्रोइलास्ट्रोमा: बिना लक्षण वाला दुर्लभ हृदय रोग बन सकता है जानलेवा
फाइब्रोइलास्ट्रोमा एक दुर्लभ लेकिन गंभीर हृदय रोग है, जो बिना लक्षण के भी जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार नियमित हृदय जांच और समय पर उपचार से इसके खतरे को कम किया जा सकता है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l हृदय रोगों का नाम आते ही आमतौर पर हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर या ब्लॉकेज जैसी समस्याएं याद आती हैं, लेकिन कुछ हृदय रोग ऐसे भी होते हैं जो बेहद दुर्लभ, बिना लक्षण वाले और गंभीर खतरा पैदा करने वाले होते हैं। फाइब्रोइलास्ट्रोमा ऐसा ही एक दुर्लभ हृदय ट्यूमर है, जो समय पर पहचान नहीं होने पर जानलेवा साबित हो सकता है।
कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. स्नेहिल गोस्वामी के अनुसार प्राथमिक हृदय ट्यूमर बहुत कम लोगों में पाए जाते हैं, लेकिन पैपिलरी फाइब्रोइलास्ट्रोमा हृदय के वाल्व को प्रभावित करने वाले सबसे सामान्य ट्यूमर में से एक माना जाता है। यह आमतौर पर एओर्टिक या माइट्रल वाल्व पर विकसित होता है।
हालांकि यह कैंसर नहीं होता, लेकिन इसकी नाजुक संरचना के कारण इसके छोटे टुकड़े या रक्त के थक्के टूटकर शरीर में रक्त प्रवाह के साथ आगे बढ़ सकते हैं। इससे स्ट्रोक, हार्ट अटैक और अन्य गंभीर जटिलताएं होने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 30 प्रतिशत मरीजों में स्ट्रोक ही इसका पहला लक्षण बनकर सामने आता है।
इस बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई मरीजों को इसका पता नियमित हृदय जांच या अचानक स्वास्थ्य समस्या होने पर चलता है। सांस फूलना, धड़कन तेज होना, चक्कर आना, सीने में दर्द और स्ट्रोक जैसे संकेत इसके संभावित लक्षण हो सकते हैं।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर ऐसे संकेतों को सामान्य थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लगातार बैठकर काम करना, बढ़ता तनाव, मोटापा, अनियमित नींद और स्वास्थ्य जांच की अनदेखी जैसे कारण ऐसे रोगों की पहचान में देरी कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक कार्डियक इमेजिंग तकनीकों की मदद से अब इस बीमारी का जल्दी और सटीक निदान संभव है। इकोकार्डियोग्राफी और ट्रांसइसोफेजियल इकोकार्डियोग्राफी जैसी जांचों से ट्यूमर की पहचान की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर सीटी स्कैन या कार्डियक एमआरआई भी कराया जाता है।
उपचार मरीज की स्थिति और ट्यूमर के आकार पर निर्भर करता है। कुछ मामलों में केवल निगरानी पर्याप्त होती है, जबकि गंभीर स्थिति में सर्जरी के जरिए ट्यूमर हटाना जरूरी हो सकता है ताकि स्ट्रोक और अन्य जटिलताओं से बचाव किया जा सके।
विशेषज्ञों ने लोगों से नियमित हृदय जांच कराने और किसी भी असामान्य लक्षण को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की है। जागरूकता और समय पर उपचार ही इस तरह के शांत लेकिन गंभीर हृदय रोगों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जा रहा है।