पीएम मोदी की बंगाल में चुनावी हुंकार, कूचबिहार से अभियान शुरू; सीएम स्टालिन ने NDA को दी खुली चुनौती
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूचबिहार से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भाजपा के प्रचार अभियान की शुरुआत की। वहीं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने NDA को चुनौती देते हुए 3-भाषा नीति पर खुलकर ऐलान करने की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कूचबिहार से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी के प्रचार अभियान का आगाज किया। कूचबिहार के ऐतिहासिक रास मेला मैदान में आयोजित “विजय संकल्प सभा” को संबोधित करते हुए उन्होंने राज्य में पार्टी की रणनीति, विकास एजेंडा और राजनीतिक दृष्टिकोण को सामने रखा।
यह रैली विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद राज्य में प्रधानमंत्री की पहली बड़ी चुनावी सभा मानी जा रही है। भाजपा ने इस आयोजन को काफी अहम बताया है और इसे चुनावी माहौल बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के अनुसार, यह अभियान “विकसित बंगाल” के विजन पर आधारित है, जिसमें विकास, सुशासन और कानून-व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बनाया गया है।
सभा के दौरान प्रधानमंत्री ने राज्य की मौजूदा तृणमूल कांग्रेस सरकार को निशाने पर लेते हुए भ्रष्टाचार, सिंडिकेट राज और कथित “कट-मनी” जैसे मुद्दों को उठाया। भाजपा का कहना है कि यह रैली बंगाल को भय और भ्रष्टाचार से मुक्त कर विकास और विश्वास की दिशा में ले जाने की शुरुआत है।
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी 14 मार्च को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में एक बड़ी रैली को संबोधित कर चुके हैं, जहां उन्होंने लगभग 18,680 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया था। अब कूचबिहार से शुरू हुआ यह चुनावी अभियान आने वाले दिनों में राज्यभर में रैलियों, रोड शो और जनसभाओं के जरिए और तेज किया जाएगा।
दूसरी ओर, दक्षिण भारत की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है। एम.के. स्टालिन ने एक चुनावी सभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान में हिम्मत है, तो वे तमिलनाडु में 3-भाषा नीति लागू करने की घोषणा करें।
स्टालिन, जो द्रविड़ मुनेत्र कषगम के अध्यक्ष भी हैं, ने केंद्र सरकार और NDA पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “डबल इंजन सरकार” का दावा पूरी तरह विफल साबित हुआ है। उन्होंने इसे “फेल इंजन” करार देते हुए कहा कि तमिलनाडु की जनता इसे राज्य में प्रवेश नहीं करने देगी।
उन्होंने आगे कहा कि पिछली सरकारों के दौरान राज्य को कई समस्याओं का सामना करना पड़ा और NDA सरकार ने भी देश को कई चुनौतियों में धकेला है। नोटबंदी और कोविड-19 महामारी के दौरान ऑक्सीजन की कमी जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
स्टालिन ने रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों और उपलब्धता को लेकर भी केंद्र पर निशाना साधा और कहा कि आम जनता आज भी इससे परेशान है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर जनता को राहत कब मिलेगी।
इस तरह एक ओर जहां पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरमाता जा रहा है, वहीं तमिलनाडु में भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले समय में इन दोनों राज्यों की राजनीति राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा असर डाल सकती है।