कपास आयात शुल्क हटाने की मांग, तमिलनाडु सीएम विजय ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री Vijay ने प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखकर कपास पर लगाए गए 11 फीसदी आयात शुल्क को समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कपास और धागे की बढ़ती कीमतों के कारण राज्य का कपड़ा उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है और लाखों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो सकती है।

May 15, 2026 - 15:29
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कपास आयात शुल्क हटाने की मांग, तमिलनाडु सीएम विजय ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

UNITED NEWS OF ASIA. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री Vijay ने कपास पर लगाए गए आयात शुल्क को लेकर प्रधानमंत्री Narendra Modi को पत्र लिखा है। मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने और कपड़ा उद्योग को राहत देने के लिए कपास पर लागू 11 प्रतिशत आयात शुल्क को तत्काल समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कच्चे माल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण राज्य का टेक्सटाइल और परिधान उद्योग गंभीर संकट का सामना कर रहा है।

मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में कहा कि घरेलू कपास उत्पादन में कमी और बाजार में बढ़ती कीमतों की वजह से कपड़ा निर्माताओं को कच्चे माल की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो इसका असर लाखों मजदूरों और उद्योग से जुड़े लोगों की आजीविका पर पड़ सकता है।

प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में Vijay ने बताया कि पिछले दो महीनों में कपास की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उनके अनुसार कपास की कीमत 54,700 रुपये प्रति कैंडी से बढ़कर 67,700 रुपये प्रति कैंडी तक पहुंच गई है। वहीं धागे की कीमतें भी 301 रुपये प्रति किलो से बढ़कर लगभग 330 रुपये प्रति किलो हो गई हैं। इससे कपड़ा उद्योग पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु देश का सबसे बड़ा टेक्सटाइल और परिधान निर्यातक राज्य है। यहां लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कपड़ा उद्योग पर निर्भर हैं। ऐसे में कच्चे माल की कीमतों में तेजी से हो रही बढ़ोतरी उत्पादन लागत को प्रभावित कर रही है, जिससे उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर हो सकती है।

उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कपास की निरंतर आपूर्ति केवल आयात के माध्यम से ही सुनिश्चित की जा सकती है। लेकिन मौजूदा आयात शुल्क के कारण उद्योग को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। ऐसे में आयात शुल्क हटाने से कपड़ा निर्माताओं को राहत मिलेगी और उद्योग की उत्पादन क्षमता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

रिपोर्ट के अनुसार तमिलनाडु का टेक्सटाइल सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देता है। राज्य में सूत, कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स का बड़ा उत्पादन होता है, जिसका निर्यात देश-विदेश में किया जाता है। उद्योग से जुड़े संगठनों ने भी लंबे समय से कपास आयात शुल्क कम करने की मांग उठाई है।

अब मुख्यमंत्री विजय के इस पत्र के बाद केंद्र सरकार के रुख पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं। उद्योग जगत को उम्मीद है कि यदि आयात शुल्क में राहत मिलती है तो कपड़ा उद्योग को बढ़ती लागत और कच्चे माल की कमी से राहत मिल सकती है। फिलहाल यह मुद्दा उद्योग और राजनीति दोनों क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना हुआ है।