“ड्रोन और रोबोट तय करेंगे भविष्य की जंग”, एयरफोर्स चीफ अमर प्रीत सिंह ने बताई भारत की रणनीति

भारतीय वायु सेना प्रमुख Amar Preet Singh ने कहा है कि भविष्य की लड़ाइयां ड्रोन, अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) और काउंटर-UAS तकनीकों के जरिए लड़ी जाएंगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध तेजी से ऑटोनॉमस और तकनीक आधारित मॉडल की ओर बढ़ रहा है, जहां ड्रोन निगरानी के साथ-साथ हमला करने वाले हथियार के रूप में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।

May 15, 2026 - 15:23
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“ड्रोन और रोबोट तय करेंगे भविष्य की जंग”, एयरफोर्स चीफ अमर प्रीत सिंह ने बताई भारत की रणनीति

UNITED NEWS OF ASIA. भारतीय वायु सेना के प्रमुख Amar Preet Singh ने भविष्य के युद्धों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय की लड़ाइयां ड्रोन, अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) और काउंटर-UAS तकनीकों के जरिए तय होंगी। आधुनिक युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है और अब युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है। नई तकनीकों ने सैन्य रणनीतियों और युद्ध संचालन की पूरी तस्वीर बदल दी है।

दिल्ली में आयोजित CAPSS-IMR जॉइंट सेमिनार को संबोधित करते हुए एयर चीफ मार्शल Amar Preet Singh ने कहा कि ड्रोन अब भविष्य की तकनीक नहीं, बल्कि आज की वास्तविकता बन चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में ड्रोन केवल निगरानी या जानकारी जुटाने का माध्यम नहीं रहे, बल्कि वे आक्रमण करने वाले प्रभावी हथियार के रूप में भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केंद्रीकृत एयर पावर मॉडल से आगे बढ़कर ऑटोनॉमस और तकनीक आधारित मॉडल की ओर तेजी से विकसित हो रहा है। युद्ध के मैदान में मानव संसाधन पर निर्भरता कम करने और कम जोखिम में अधिक प्रभावी कार्रवाई करने के लिए ड्रोन तकनीक सबसे अहम भूमिका निभा रही है। यही कारण है कि दुनिया के कई बड़े देश इस क्षेत्र में भारी निवेश कर रहे हैं।

एयर चीफ मार्शल ने बताया कि ड्रोन की सबसे बड़ी विशेषता उनकी कम लागत, कम जोखिम और लंबे समय तक संचालन क्षमता है। पारंपरिक लड़ाकू विमानों की तुलना में ड्रोन का संचालन अधिक सुरक्षित और कई परिस्थितियों में ज्यादा प्रभावी माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि ड्रोन आधारित युद्ध प्रणाली से सैनिकों की जान का जोखिम कम होता है और दुश्मन पर सटीक कार्रवाई संभव हो पाती है।

उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के युद्ध केवल हथियारों की ताकत से नहीं, बल्कि तकनीकी क्षमता और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों से तय होंगे। ऐसे में भारत को भी रक्षा क्षेत्र में तेजी से नई तकनीकों को अपनाना होगा। भारतीय वायु सेना लगातार आधुनिक तकनीकों को शामिल कर अपनी क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन युद्ध सहित हाल के कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में ड्रोन तकनीक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। निगरानी, लक्ष्य पहचान और सटीक हमलों में ड्रोन ने युद्ध के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। इसी अनुभव को देखते हुए भारत भी अपनी रक्षा रणनीति में ड्रोन और काउंटर ड्रोन सिस्टम पर विशेष फोकस कर रहा है।

भारत सरकार और रक्षा एजेंसियां स्वदेशी ड्रोन तकनीक विकसित करने पर भी जोर दे रही हैं। “मेक इन इंडिया” और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। आने वाले वर्षों में ड्रोन और रोबोटिक सिस्टम भारतीय सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।