कृषि विभाग पदोन्नति विवाद: सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या पर बवाल, कार्रवाई की मांग
छत्तीसगढ़ में कृषि विभाग के 235 अधिकारियों की पदोन्नति को लेकर विवाद गहरा गया है। छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत व्याख्या कर भ्रामक खबरें फैलाने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. हितेश पाण्डेय, जांजगीर। छत्तीसगढ़ के जांजगीर में कृषि विभाग से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है, जो अब न्यायालय के फैसलों की व्याख्या को लेकर और गहरा गया है। वर्ष 2021 में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों से कृषि विकास अधिकारी के पद पर 235 अधिकारियों की पदोन्नति की गई थी। यह पदोन्नति वर्ष 2018 में प्रशासनिक नियमों में किए गए संशोधन के आधार पर हुई थी।
इस पदोन्नति के खिलाफ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ ने उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका दायर की थी। याचिका में संघ ने आरोप लगाया कि पदोन्नति प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया है। इस पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने पदोन्नति नियम में किए गए संशोधन को “अल्ट्रा वायर्स (Ultra Vires)” घोषित कर दिया था, यानी इसे कानूनी रूप से अमान्य ठहराया गया।
हालांकि, इस फैसले के खिलाफ छत्तीसगढ़ शासन ने उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की। शासन की ओर से दलील दी गई कि कृषि स्नातकों को गुणवत्ता नियंत्रण के लिए निरीक्षक के रूप में नियुक्त करना आवश्यक है। इसी कारण अलग-अलग योग्यता के आधार पर अलग वरिष्ठता सूची बनाकर पदोन्नति की गई थी, जो नियमों के अनुरूप है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद महत्वपूर्ण निर्णय दिया। अदालत ने याचिका दायर करने वाले चार प्रतिवादियों को पदोन्नति सूची में शामिल करने का निर्देश दिया, लेकिन उच्च न्यायालय के फैसले को व्यापक रूप से लागू करने के बजाय इसे केवल इन चार मामलों तक सीमित रखा। इस प्रकार, 235 अधिकारियों की पूरी पदोन्नति को निरस्त नहीं किया गया।
इसी निर्णय को लेकर अब नया विवाद खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ ने आरोप लगाया है कि ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संघ द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसले की गलत और भ्रामक व्याख्या की जा रही है। संघ का कहना है कि सोशल मीडिया और कुछ समाचार पत्रों में यह खबरें फैलाई जा रही हैं कि पूरी पदोन्नति प्रक्रिया निरस्त कर दी गई है, जो पूरी तरह गलत है।
संघ ने इसे न केवल भ्रामक बल्कि न्यायालय की अवमानना भी बताया है। उनका कहना है कि इस तरह की गलत जानकारी से अधिकारियों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है और प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कृषि स्नातक शासकीय कृषि अधिकारी संघ ने शासन को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में मांग की गई है कि इस प्रकार की झूठी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। विशेष रूप से संघ के अध्यक्ष विजय लहरे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि न्यायालय के फैसलों की सही जानकारी और उसकी सटीक व्याख्या कितनी जरूरी है। गलत जानकारी न केवल भ्रम फैलाती है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकती है।
फिलहाल, इस मामले को लेकर प्रशासन और संबंधित संगठनों के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। आने वाले दिनों में इस पर शासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।