फर्जी MBBS डिग्री गिरोह का पर्दाफाश, रायपुर में युवक गिरफ्तार

रायपुर पुलिस ने फर्जी MBBS डिग्री के आधार पर मेडिकल प्रैक्टिस करने वाले युवक को गिरफ्तार किया है। मामले में दिल्ली से संचालित गिरोह का भी खुलासा हुआ है, जिसकी सरगना को पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

Apr 7, 2026 - 19:42
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फर्जी MBBS डिग्री गिरोह का पर्दाफाश, रायपुर में युवक गिरफ्तार

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में फर्जी MBBS डिग्री के जरिए मेडिकल प्रैक्टिस करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है, जो नकली डिग्री के आधार पर लोगों का इलाज कर रहा था। इस कार्रवाई के बाद पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान अंकित तिवारी के रूप में हुई है। वह धमधा स्थित लाइफ लाइन हॉस्पिटल में फर्जी डिग्री के आधार पर मेडिकल प्रैक्टिस कर रहा था। आरोपी के पास जो डिग्री पाई गई, वह डी.वाई. पाटिल विद्यापीठ विश्वविद्यालय पुणे के नाम से जारी फर्जी MBBS डिग्री थी।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि यह कोई एकल मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो लोगों को पैसे लेकर फर्जी मेडिकल डिग्रियां उपलब्ध कराता था। इस गिरोह का संचालन दिल्ली से किया जा रहा था।

इस मामले में पुलिस ने गिरोह की सरगना साक्षी सिंह को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। उसे रायपुर लाकर दो दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है, ताकि इस पूरे नेटवर्क के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जा सके।

इसके अलावा, इस गिरोह से जुड़े चार अन्य आरोपियों—भुनेश्वर बंजारे, नरेश मनहर, हीरा दिवाकर और राकेश रात्रे—को पहले ही गिरफ्तार कर रायपुर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस का मानना है कि इन आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं।

मामले की जांच सिविल लाइन थाना, रायपुर में दर्ज एफआईआर के आधार पर की जा रही है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस गिरोह के जरिए कितने लोगों को फर्जी डिग्रियां दी गईं और कितने लोग इस तरह की अवैध मेडिकल प्रैक्टिस में शामिल हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों से आम जनता की जान को गंभीर खतरा हो सकता है, क्योंकि बिना उचित योग्यता के इलाज करना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि खतरनाक भी है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आगे भी इस तरह के मामलों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी और फर्जी डिग्री के आधार पर काम करने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि स्वास्थ्य क्षेत्र में निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया को और अधिक सख्त करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस प्रकार के फर्जीवाड़े पर रोक लगाई जा सके और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।