रांची के 13 वर्षीय छात्र ने नासा की सुरक्षा खामी उजागर की, ‘हॉल ऑफ फेम’ से सम्मानित

रांची के 13 वर्षीय छात्र दिव्य प्रकाश ने नासा की वेबसाइट में सुरक्षा खामी उजागर कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। इस उपलब्धि पर नासा ने उन्हें ‘हॉल ऑफ फेम’ और ‘लेटर ऑफ रिकॉग्निशन’ से सम्मानित किया है।

Mar 27, 2026 - 12:23
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रांची के 13 वर्षीय छात्र ने नासा की सुरक्षा खामी उजागर की, ‘हॉल ऑफ फेम’ से सम्मानित

UNITED NEWS OF ASIA.  झारखंड की राजधानी रांची से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां महज 13 साल के एक छात्र ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। 8वीं कक्षा में पढ़ने वाले दिव्य प्रकाश ने दुनिया की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसी नासा की डिजिटल सुरक्षा प्रणाली में खामी खोजकर उसे रिपोर्ट किया, जिसके लिए उन्हें सम्मानित किया गया है।

दिव्य प्रकाश की इस उपलब्धि ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। इतनी कम उम्र में उनकी इस सफलता को लेकर स्थानीय स्तर पर भी खुशी का माहौल है।

दरअसल, नासा द्वारा एक ऑनलाइन वल्नरेबिलिटी डिस्क्लोजर प्रोग्राम आयोजित किया गया था, जिसमें दुनिया भर के प्रतिभाशाली युवाओं को सिस्टम में मौजूद सुरक्षा खामियों को खोजने और रिपोर्ट करने का मौका दिया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य साइबर सुरक्षा को और मजबूत बनाना था।

इसी प्रोग्राम में भाग लेते हुए दिव्य प्रकाश ने नासा के एक डिजिटल प्लेटफॉर्म, विशेष रूप से उसके फेसबुक लिंक में एक तकनीकी खामी को खोज निकाला। उन्होंने न केवल इस कमी की पहचान की, बल्कि उसे सही तरीके से रिपोर्ट भी किया। उनकी रिपोर्ट की पुष्टि होने के बाद नासा ने उनकी सराहना की।

इस उपलब्धि के लिए दिव्य प्रकाश को ‘हॉल ऑफ फेम’ और ‘लेटर ऑफ रिकॉग्निशन’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है। यह सम्मान उन लोगों को दिया जाता है, जो किसी संगठन की सुरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

बताया जा रहा है कि इससे पहले 16 वर्ष की उम्र में किसी छात्र को ‘हॉल ऑफ फेम’ में जगह मिली थी, लेकिन दिव्य प्रकाश ने मात्र 13 वर्ष की आयु में यह उपलब्धि हासिल कर एक नया उदाहरण पेश किया है।

दिव्य प्रकाश की इस सफलता के पीछे उनकी कड़ी मेहनत, तकनीक के प्रति रुचि और निरंतर सीखने की लगन को मुख्य कारण बताया जा रहा है। उनके परिजनों का कहना है कि बचपन से ही उन्हें कंप्यूटर और टेक्नोलॉजी में गहरी रुचि रही है, जिसे उन्होंने सही दिशा में आगे बढ़ाया।

अब उनके परिवार की कोशिश है कि इस उपलब्धि को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया जाए, क्योंकि इतनी कम उम्र में इस तरह का अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त करना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

दिव्य प्रकाश की यह कहानी देश के युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। यह दर्शाती है कि यदि सही मार्गदर्शन और मेहनत हो, तो कम उम्र में भी बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।

आज के डिजिटल युग में साइबर सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है, और ऐसे में युवा प्रतिभाओं का इस क्षेत्र में योगदान भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।