मिली जानकारी के अनुसार, पंचायत की धारा 40 के तहत सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। बताया जा रहा है कि पंचायत के अधिकांश पंच भाजपा समर्थित हैं और उन्होंने मिलकर सरपंच के खिलाफ प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया। हालांकि, प्रशासन की ओर से दो बार समय दिए जाने के बावजूद अब तक अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है, जिससे पंचों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
पंचों का कहना है कि बार-बार समय मिलने के बावजूद प्रशासन की ओर से कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। उनका आरोप है कि इस देरी के कारण लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और सरपंच के खिलाफ उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।
गांव के एक वरिष्ठ नागरिक प्रकाश ने भी इस मामले में अपनी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि वह पिछले 30 वर्षों से भाजपा की राजनीति से जुड़े हुए हैं, लेकिन वर्तमान में कुछ युवा उनके ऊपर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका आरोप है कि अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ी जानकारी और निर्णयों की पारदर्शिता भी नहीं रखी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राम सचिव द्वारा अविश्वास प्रस्ताव निरस्त होने की सूचना उन्हें नहीं दी गई, जिससे संदेह और गहरा गया है।
वहीं, कुछ पंचों ने सरपंच नीलिमा साहू की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरपंच न तो पंचायत बैठकों में ठीक से संवाद करती हैं और न ही पंचों की समस्याओं और सुझावों पर ध्यान देती हैं। इससे पंचायत के कार्य प्रभावित हो रहे हैं और विकास कार्यों में बाधा आ रही है।
उपसरपंच विजय सिंह ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि पंचायत में समन्वय की कमी साफ नजर आ रही है और यदि जल्द ही स्थिति नहीं सुधरी, तो विवाद और बढ़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि पंचायत की कार्यप्रणाली सुचारू रूप से चल सके।
इस पूरे मामले ने ग्राम सोमनी की राजनीति को गरमा दिया है। पंचों और सरपंच के बीच बढ़ती खींचतान से गांव का माहौल भी प्रभावित हो रहा है। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस विवाद को किस तरह सुलझाता है और क्या समय रहते अविश्वास प्रस्ताव पर कोई ठोस निर्णय लिया जाता है।
अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला, तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है और पंचायत स्तर पर राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है।