अमेरिका-ईरान डील में पाकिस्तान को झटका, आसिम मुनीर की कोशिशें नाकाम; अब कतर के PM अल-थानी एक्टिव

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मध्यस्थता असफल होती नजर आ रही है। ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसके बाद कतर के प्रधानमंत्री अल-थानी सक्रिय हो गए हैं। बताया जा रहा है कि अमेरिका अब कतर के जरिए डील को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है।

May 11, 2026 - 13:50
 0  3
अमेरिका-ईरान डील में पाकिस्तान को झटका, आसिम मुनीर की कोशिशें नाकाम; अब कतर के PM अल-थानी एक्टिव

UNITED NEWS OF ASIA. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर चल रही कूटनीतिक कोशिशों के बीच पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की मध्यस्थता के प्रयास सफल नहीं हो सके हैं। ईरान ने अमेरिका की शर्तों पर समझौता करने से साफ इनकार कर दिया है, जिसके बाद अब कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी सक्रिय हो गए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने हाल ही में पाकिस्तान के जरिए ईरान को एक पन्ने का समझौता प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव का उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करना और एक नई डील की दिशा में आगे बढ़ना था। हालांकि, ईरान ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी और अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया।

बताया जा रहा है कि ईरान ने अपने यूरेनियम संवर्धन केंद्रों को खत्म करने की मांग को अस्वीकार कर दिया है। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के जवाब को “अस्वीकार्य” बताया। इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मध्यस्थता की कोशिशों को बड़ा झटका दिया है।

मुनीर की कोशिशों के विफल होने के बाद अब कतर के प्रधानमंत्री अल-थानी ने मोर्चा संभाल लिया है। जानकारी के अनुसार, अल-थानी ने अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, वार्ता दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनेर से मियामी में मुलाकात की है। माना जा रहा है कि इन बैठकों का उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच समझौते का रास्ता तैयार करना है।

सूत्रों के मुताबिक, कतर अब ईरानी नेतृत्व से सीधे बातचीत करेगा ताकि दोनों देशों के बीच किसी सहमति तक पहुंचा जा सके। अमेरिका चाहता है कि राष्ट्रपति ट्रंप के प्रस्तावित चीन दौरे से पहले इस समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाए। ट्रंप का चीन दौरा 13 से 15 मई के बीच प्रस्तावित बताया जा रहा है।

कतर को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक प्रभावशाली मध्यस्थ माना जाता है। इससे पहले भी अमेरिका और अफगानिस्तान के बीच 2021 में हुए समझौते में कतर ने अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा वेनेजुएला संकट में भी कतर की मध्यस्थता को महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान को कतर पर भरोसा है और यही वजह है कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव के बावजूद ईरान ने कतर के खिलाफ कभी बड़ा सैन्य कदम नहीं उठाया। जबकि कतर में अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच यह डील वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि दोनों देशों के बीच समझौता नहीं होता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, मध्य पूर्व की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

फिलहाल पूरी दुनिया की नजर कतर की मध्यस्थता पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि अल-थानी अमेरिका और ईरान के बीच जमी बर्फ को पिघलाने में कितने सफल होते हैं।