इस केंद्र की स्थापना के लिए विद्यालय के संचालक पवन देवांगन और सारिका देवांगन बेंगलुरु जाकर आध्यात्मिक गुरु Sri Sri Ravi Shankar से मिले और उनके आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन में इस केंद्र की शुरुआत की गई। इस अवसर को विद्यालय परिवार के लिए एक नई ऊर्जा और दिशा देने वाला बताया गया।
गुरुदेव श्री श्री रविशंकर के विचारों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि जैसे पौधों के विकास के लिए जल आवश्यक होता है, वैसे ही बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए संस्कार अत्यंत जरूरी हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए Art of Living Foundation के तत्वावधान में इस बाल संस्कार केंद्र की शुरुआत की गई है।
इस केंद्र के माध्यम से बच्चों को योग और प्राणायाम के जरिए शारीरिक और मानसिक संतुलन सिखाया जाएगा। ध्यान के माध्यम से उनकी एकाग्रता और आंतरिक शांति को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही नैतिक शिक्षा के जरिए अनुशासन, सम्मान, जिम्मेदारी और करुणा जैसे मूल्यों को विकसित किया जाएगा। कार्यक्रम में व्यक्तित्व विकास, नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे बच्चे जीवन में सफल और जिम्मेदार नागरिक बन सकें।
विद्यालय प्रबंधन का मानना है कि यह केंद्र बच्चों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं देगा, बल्कि उन्हें जीवन जीने की कला भी सिखाएगा। इससे वे भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ते हुए आधुनिक जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनेंगे।
इसी क्रम में आर्ट ऑफ लिविंग के तत्वावधान में 29 अप्रैल से 2 मई तक कवर्धा में “कलर्स ऑफ जॉय” नामक 4 दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन भी किया जा रहा है। यह शिविर 5 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए आयोजित होगा, जिसमें इंट्यूशन प्रोग्राम, उत्कर्ष योग और मेधा योग जैसे सत्र शामिल होंगे। इन सत्रों के माध्यम से बच्चों की एकाग्रता, स्मरण शक्ति, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास को सुदृढ़ किया जाएगा।
इस पहल को सफल बनाने में आर्ट ऑफ लिविंग के जिला संयोजक कैलाश शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके प्रयासों से यह कार्यक्रम साकार हो सका और क्षेत्र में शिक्षा के साथ संस्कारों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।
यह आयोजन न केवल शैक्षणिक बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा।