फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम : राज्यपाल रमेन डेका

राज्यपाल रमेन डेका ने रायपुर में आयोजित डॉक्यूमेंट्री फिल्म सम्मान समारोह में कहा कि फिल्में केवल मनोरंजन नहीं बल्कि समाज को जागरूक करने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कलाकारों से सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का आह्वान किया।

Jun 12, 2026 - 18:31
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फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम : राज्यपाल रमेन डेका

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर, 12 जून 2026। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि फिल्में और डॉक्यूमेंट्री केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक संदेश देने का एक प्रभावी माध्यम भी हैं। वे रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था। राज्यपाल ने कहा कि मानव सभ्यता के आरंभ से ही लोग अपने विचारों और भावनाओं को विभिन्न माध्यमों से व्यक्त करते आए हैं। समय के साथ नाटक, रेडियो, टेलीविजन और डिजिटल माध्यमों ने इस प्रक्रिया को और अधिक व्यापक बना दिया है।

उन्होंने कहा कि सिनेमा का प्रारंभिक उद्देश्य केवल मनोरंजन या व्यवसाय नहीं था, बल्कि समाज को संदेश देना और जागरूक करना भी था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी भारतीय सिनेमा ने लोगों को जागरूक करने और देशभक्ति की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

राज्यपाल ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। ऐसे में फिल्म निर्माताओं की जिम्मेदारी है कि वे अब बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली को देश और दुनिया के सामने प्रस्तुत करें, जिससे क्षेत्र की सकारात्मक छवि को और मजबूती मिले।

उन्होंने प्रसिद्ध फिल्मों और नाटकों जैसे ‘सद्गति’, ‘चरणदास चोर’ और ‘देवदास’ का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में बदलाव और जागरूकता लाने वाली फिल्मों की आज भी उतनी ही आवश्यकता है जितनी पहले थी।

छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री फिल्में हमारी लोककला, लोकगीत, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने कलाकारों से आह्वान किया कि वे इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएं।

उन्होंने बढ़ती मोबाइल लत पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज की नई पीढ़ी खेल के मैदानों से दूर होती जा रही है, जिससे उनकी रचनात्मक क्षमता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं को कला, संगीत, नाटक और नृत्य जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना आवश्यक है।

कार्यक्रम में राज्यपाल ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित डॉक्यूमेंट्री फिल्मों ‘भीम दाऊ चिंताराम’, ‘हैप्पी बर्थडे’ और ‘स्क्रीन’ के निर्माता-निर्देशकों को सम्मानित भी किया।

इस अवसर पर संस्कृति विभाग के संचालक संजय कन्नौजे ने स्वागत भाषण दिया, जबकि छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन फिल्म निर्माता-निर्देशक मनोज वर्मा ने किया।

कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, फिल्म जगत से जुड़े कलाकार, निर्माता-निर्देशक, छात्र-छात्राएं और कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।