भाजपा नेता नागमणि कुशवाहा की कथित टिप्पणी पर अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने जताई आपत्ति, कानूनी कार्रवाई की मांग
रायपुर में अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने भाजपा नेता नागमणि कुशवाहा की सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए इसे सनातन धर्म की भावनाओं को आहत करने वाला बताया है। उन्होंने संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की है और भाजपा से इस मामले पर अपना रुख स्पष्ट करने का आग्रह किया है। मामले में संबंधित पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह,रायपुर l अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने सोशल मीडिया पर प्रसारित भाजपा नेता नागमणि कुशवाहा की कथित टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताते हुए संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है। प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन्होंने दावा किया कि उक्त टिप्पणी से सनातन धर्म में आस्था रखने वाले लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने शासन, प्रशासन और संबंधित जांच एजेंसियों से मामले का संज्ञान लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
मनोज सिंह ठाकुर ने अपने बयान में कहा कि किसी भी धर्म, आस्था या आराध्य के संबंध में सार्वजनिक मंच पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार है, लेकिन यह अधिकार पूर्णतः असीमित नहीं है और इसका प्रयोग कानून द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर ही किया जाना चाहिए।
उन्होंने भारतीय जनता पार्टी से भी इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करने का आग्रह किया। उनके अनुसार यदि किसी राजनीतिक दल का कोई पदाधिकारी धार्मिक आस्था से जुड़े विषय पर विवादित टिप्पणी करता है, तो संगठन को इस पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मामलों में सभी राजनीतिक दलों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए।
अधिवक्ता ने अपने बयान में धार्मिक ग्रंथों और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत का संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक आस्था रखने का अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर आहत करने का प्रयास कानून के दायरे में जांच का विषय हो सकता है।
मनोज सिंह ठाकुर ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर तथ्यों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की लागू धाराओं के तहत आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो इस मामले में सक्षम न्यायिक मंच पर भी विधिक प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
उन्होंने दावा किया कि यह केवल किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सामाजिक सद्भाव से जुड़ा विषय है। इसलिए प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुरूप कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवादों से बचा जा सके।