प्रधानमंत्री की पगड़ी केवल पहनावे तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हर वर्ष इसमें भारतीय संस्कृति, परंपरा और स्थानीय हस्तशिल्प की झलक देखने को मिलती है। इस बार पहनी गई बंधेज पगड़ी के जरिए स्थानीय कारीगरों और पारंपरिक हस्तकला को प्रोत्साहन देने का संदेश भी सामने आया।
बंधेज राजस्थान और गुजरात की प्रसिद्ध पारंपरिक टाई एंड डाई हस्तकला है। इसे कपड़े को विशेष तरीके से बांधकर और रंगकर तैयार किया जाता है। कपड़े पर बनने वाले छोटे छोटे बिंदु और आकर्षक रंग संयोजन इसकी प्रमुख पहचान हैं। राजस्थान और गुजरात में बंधेज को उत्सव, सम्मान और पारंपरिक गौरव से जोड़कर देखा जाता है। शादी समारोहों से लेकर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों तक इसका उपयोग किया जाता है।
इस वर्ष प्रधानमंत्री की पगड़ी गहरे लाल रंग की थी, जिस पर सफेद रंग के छोटे छोटे बिंदु दिखाई दे रहे थे। लाल रंग को उत्साह, शक्ति और उत्सव का प्रतीक माना जाता है। बंधेज की पारंपरिक शैली में तैयार यह पगड़ी भारतीय कारीगरों की कला और मेहनत को भी सामने लाती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के पहनावे में पिछले कई वर्षों से पगड़ी विशेष आकर्षण का केंद्र रही है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद लाल किले से अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान उन्होंने राजस्थानी बंधेज पगड़ी पहनी थी। वर्ष 2015 में पीले रंग के साथ लाल और गहरे हरे रंग के क्रिस क्रॉस पैटर्न वाली पगड़ी नजर आई। वर्ष 2016 में गुलाबी और पीले रंग की टाई एंड डाई पगड़ी ने आकर्षण बटोरा।
वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री लाल रंग की पगड़ी में नजर आए। वर्ष 2018 में उन्होंने भगवा रंग की पगड़ी पहनी, जबकि वर्ष 2019 में लाल, पीले और हरे रंगों से सजी राजस्थानी पगड़ी पहनी गई। वर्ष 2020 में केसरिया रंग की पगड़ी के साथ क्रीम रंग का प्रिंट देखने को मिला।
वर्ष 2021 में केसरी और लाल रंग के पैटर्न वाली पगड़ी प्रधानमंत्री के पहनावे का हिस्सा बनी। वर्ष 2022 में तिरंगे रंगों वाली पगड़ी ने खास आकर्षण पैदा किया। वर्ष 2023 में बहुरंगी बांधनी प्रिंट वाली राजस्थानी पगड़ी पहनी गई, जिसमें लाल, पीले, हरे और बैंगनी रंगों का संयोजन दिखाई दिया।
वर्ष 2024 में भगवा और हरे रंग के संयोजन वाली पगड़ी प्रधानमंत्री के पहनावे में नजर आई। वर्ष 2025 में भगवा रंग की पगड़ी और उसी रंग की जैकेट के साथ तिरंगे प्रिंट ने लोगों का ध्यान खींचा।
इस तरह स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री की पगड़ी पिछले कई वर्षों से भारतीय परंपरा, क्षेत्रीय हस्तकला और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाने वाला खास प्रतीक बन गई है। वर्ष 2026 में बंधेज पगड़ी के माध्यम से राजस्थान और गुजरात की पारंपरिक कला के साथ स्थानीय कारीगरों की मेहनत को भी मंच मिला।