कार्यक्रम के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में अब परिस्थितियां बदल गई हैं और लोगों को अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने या धार्मिक गतिविधियों में भाग लेने से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने लोगों से भगवद्गीता और हनुमान चालीसा का पाठ करने, हरि कृष्ण मंत्र का जाप करने तथा धार्मिक परंपराओं का पालन करने की अपील की।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि “टीका, शिखा, धोती और तुलसी वाली सरकार” आ गई है और सरकार गौमाता की रक्षा करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि साधु, संत और धार्मिक गुरु अपने विचारों और धार्मिक संदेशों का प्रचार स्वतंत्र रूप से कर सकते हैं। उनके अनुसार, साधु-संतों का अपमान या उन्हें डराने की घटनाओं को सरकार गंभीरता से लेगी।
शुभेंदु अधिकारी ने हाल में पश्चिम बंगाल में आध्यात्मिक कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में धीरेंद्र शास्त्री की तस्वीर और पुतले का विरोध किया गया। अधिकारी ने कहा कि इस मामले में सरकार ने कार्रवाई करते हुए संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। उन्होंने दोहराया कि साधु-संतों और धार्मिक नेताओं का अपमान करने वालों के खिलाफ जेल की कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में आगामी धार्मिक आयोजनों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 29 दिसंबर को कोलकाता में करीब 10 लाख लोगों के साथ बड़े स्तर पर भगवद्गीता पाठ का कार्यक्रम प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के शामिल होने की संभावना है।
उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के संभावित पश्चिम बंगाल दौरे का भी उल्लेख किया और कहा कि मकर संक्रांति के अवसर पर धार्मिक आयोजन की योजना है। इसके अलावा उन्होंने कुरुक्षेत्र में होने वाले गीता महोत्सव में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पवेलियन लगाए जाने की बात कही।
अपने भाषण में शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी राजनीतिक टिप्पणी की और उनके द्वारा कथित तौर पर लगाए गए “आजादी” के नारे का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने राज्य में लोगों से एकजुट और सतर्क रहने की अपील की। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। कार्यक्रम में धार्मिक गतिविधियों और राज्य सरकार की नीतियों को लेकर मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया।