CJP ने इससे पहले घोषणा की थी कि यदि ज्ञानेश कुमार 26 सितंबर तक मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 2 अक्टूबर को देशभर में प्रदर्शन किया जाएगा। पार्टी ने अपने अभियान की शुरुआत मुंबई से करने की बात कही थी। 24 सितंबर को CJP ने चुनाव आयोग में सुधार और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर भी अपनी मांगें सामने रखी थीं।
प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मुंबई पुलिस के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन करने का अधिकार नहीं दिया गया तो CJP मुंबई में ‘जेल भरो आंदोलन’ करेगी। यह बयान पार्टी की ओर से प्रस्तावित अगले कदम के रूप में सामने आया है।
मुंबई पुलिस ने अनुमति को लेकर अलग पक्ष रखा है। पुलिस के अनुसार, शिवाजी पार्क में इस तरह के आयोजन के लिए संबंधित नियम और न्यायालय के निर्देश लागू होते हैं। पुलिस ने 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश और महाराष्ट्र सरकार की 2016 की गाइडलाइंस का हवाला दिया है। पुलिस का कहना है कि शिवाजी पार्क का इस्तेमाल सभाओं और अन्य गतिविधियों के लिए निर्धारित नियमों के तहत होता है और इस मामले में आवश्यक अनुमति प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी।
पुलिस ने शिवाजी पार्क क्षेत्र को आवासीय और साइलेंस जोन बताते हुए प्रस्तावित प्रदर्शन से शोर और यातायात संबंधी समस्या की आशंका भी जताई है। अधिकारियों के अनुसार, इलाके में यातायात प्रभावित होने के साथ आसपास के अस्पतालों तक पहुंच पर भी असर पड़ सकता है। पुलिस ने आयोजकों को मुंबई में किसी दूसरे स्थान का चयन कर वहां प्रदर्शन की अनुमति के लिए आवेदन करने की सलाह दी है।
रिपोर्टों के अनुसार, CJP की ओर से पहले आजाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति मांगी गई थी। इसके बाद शिवाजी पार्क में कार्यक्रम के लिए आवेदन किया गया, लेकिन वहां भी अनुमति नहीं मिली। CJP के राष्ट्रीय सचिव अक्षय शिंदे ने बताया कि दोनों स्थानों को लेकर अनुमति प्रक्रिया अपनाई गई थी।
इस पूरे मामले में एक ओर CJP प्रदर्शन के अधिकार और चुनाव आयोग से जुड़े अपने मुद्दों को लेकर आंदोलन की बात कर रही है, वहीं मुंबई पुलिस ने आयोजन स्थल और लागू नियमों के आधार पर अनुमति नहीं दिए जाने की बात कही है। फिलहाल 2 अक्टूबर को प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर आगे की स्थिति आयोजकों और प्रशासन के बीच होने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगी।