परासिया के पगारा में 61 गणेश प्रतिमाओं का एक साथ विसर्जन, हजारों श्रद्धालुओं ने निभाई वर्षों पुरानी परंपरा

मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र के पगारा में गणेश विसर्जन के दौरान हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। ग्रामीण क्षेत्रों से करीब 61 गणेश प्रतिमाएं एक साथ विसर्जन के लिए पगारा तालाब पहुंचीं। श्रद्धालु डीजे, ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के साथ विसर्जन यात्रा में शामिल हुए। नाव की सहायता से प्रतिमाओं का विसर्जन कराया गया। व्यवस्था बनाए रखने के लिए ग्राम सुरक्षा समिति और कोटवार तैनात रहे।

Sep 27, 2026 - 15:51
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परासिया के पगारा में 61 गणेश प्रतिमाओं का एक साथ विसर्जन, हजारों श्रद्धालुओं ने निभाई वर्षों पुरानी परंपरा

UNITED NEWS OF ASIA. वीरेंद्र यादव, छिंदवाड़ा l परासिया क्षेत्र के पगारा में गणेश विसर्जन के अवसर पर आस्था और परंपरा का संगम देखने को मिला। सुबह से ही ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गणेश प्रतिमाओं के साथ विसर्जन यात्रा में शामिल होने के लिए पगारा तालाब पहुंचे। इस दौरान हजारों भक्त डीजे, ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के साथ नाचते-गाते नजर आए।

पगारा में गणेश प्रतिमाओं को एक साथ विसर्जन के लिए ले जाने की वर्षों पुरानी परंपरा आज भी जारी है। इस वर्ष करीब 61 गणेश प्रतिमाएं एक साथ विसर्जन के लिए पगारा तालाब पहुंचीं। अलग-अलग पंडाल समितियों के श्रद्धालु निर्धारित समय का ध्यान रखते हुए सुबह एक साथ प्रतिमाओं के साथ यात्रा में शामिल हुए।

भक्ति गीतों से गूंजता रहा पूरा क्षेत्र

गणेश विसर्जन यात्रा के दौरान डीजे सॉन्ग, ढोल और नगाड़ों की धुन पर श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए। यात्रा के कारण पगारा गांव का माहौल भक्तिमय हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा के जयकारों के साथ प्रतिमाओं को विसर्जन स्थल तक पहुंचाया।

पगारा तालाब पहुंचने के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन की प्रक्रिया शुरू हुई। नदी क्षेत्र में नाव की सहायता से गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कराया गया। विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या मौके पर मौजूद रही।

भंडारे और प्रसाद की व्यवस्था

विसर्जन में शामिल श्रद्धालुओं के लिए नदी क्षेत्र में भंडारे और प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी की गई। स्थानीय लोगों और समितियों की ओर से श्रद्धालुओं को प्रसाद उपलब्ध कराया गया। बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण व्यवस्था बनाए रखने के लिए ग्राम सुरक्षा समिति और ग्राम कोटवारों की भी तैनाती रही।

गणेश विसर्जन के दौरान ग्रामीणों ने आपसी सहयोग के साथ व्यवस्था संभालने में योगदान दिया। पगारा में एक साथ प्रतिमाओं के विसर्जन की परंपरा के कारण आसपास के क्षेत्रों से भी लोग इस आयोजन को देखने के लिए पहुंचे।

एकता और भाईचारे की मिसाल

स्थानीय लोगों के मुताबिक, पगारा में गणेश विसर्जन की यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। अलग-अलग गणेश पंडाल समितियां आपसी समन्वय के साथ एक निर्धारित समय पर प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए लेकर पहुंचती हैं। इससे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के बीच एकता और भाईचारे का माहौल देखने को मिलता है।

गांव के वैभव जैन और विनय जैन ने बताया कि पगारा में एक साथ गणेश प्रतिमाओं को विसर्जन के लिए ले जाने की परंपरा आगे भी जारी रखने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सभी पंडाल समितियां समय का विशेष ध्यान रखती हैं, जिससे एक साथ विसर्जन की वर्षों पुरानी परंपरा को कायम रखा जा सके।

इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी, भक्ति गीतों और ढोल-नगाड़ों की आवाज से पूरा क्षेत्र गणेशमय नजर आया। स्थानीय लोगों के सहयोग और समितियों के आपसी समन्वय से विसर्जन कार्यक्रम संपन्न कराया गया।