JNKVV कुलपति नियुक्ति विवाद: 70 साल की उम्र के बाद भी पद पर बने रहने का आरोप, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

जबलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा के पद पर बने रहने को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने 30 जून 2026 को 70 वर्ष की आयु पूरी कर ली है, इसके बावजूद वे पद पर बने हुए हैं। हाईकोर्ट ने राज्य शासन सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

Nov 4, 2026 - 16:01
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JNKVV कुलपति नियुक्ति विवाद: 70 साल की उम्र के बाद भी पद पर बने रहने का आरोप, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

UNITED NEWS OF ASIA. मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (JNKVV) के कुलपति की नियुक्ति और पद पर बने रहने को लेकर विवाद सामने आया है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा की उम्र को आधार बनाकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिका में सवाल उठाया गया है कि निर्धारित आयु सीमा पूरी होने के बाद भी वे कुलपति के पद पर कैसे बने हुए हैं। मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन सहित अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। 

जानकारी के मुताबिक, यह याचिका जबलपुर निवासी डॉ. सत्येंद्र यादव की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय रायजादा ने अदालत के समक्ष दलील दी कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के निर्धारित मानदंडों के अनुसार कुलपति पद के लिए अधिकतम आयु सीमा 70 वर्ष है। याचिका में दावा किया गया है कि डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा की जन्मतिथि एक जुलाई 1956 है और उन्हें 17 नवंबर 2022 को जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था। 

याचिका के अनुसार, डॉ. मिश्रा ने 30 जून 2026 को 70 वर्ष की आयु पूरी कर ली है। इसके बावजूद उनके कुलपति पद पर बने रहने को याचिकाकर्ता ने UGC के निर्धारित मानदंडों के विपरीत बताया है। इसी आधार पर अदालत से मांग की गई है कि उनकी पद पर निरंतरता को अवैध घोषित किया जाए और उन्हें तत्काल कुलपति पद से हटाने के निर्देश दिए जाएं।

याचिकाकर्ता ने अपनी दलीलों के समर्थन में राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति के दौरान 70 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा निर्धारित किए जाने का भी उल्लेख किया है। इसके अलावा, याचिका में सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का हवाला देते हुए UGC के नियमों की अनिवार्यता से जुड़ा तर्क रखा गया है। हालांकि, इन सभी दलीलों पर अंतिम निर्णय अदालत को सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद लेना है। 

याचिका में केवल कुलपति को पद से हटाने की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि राज्य शासन और राजभवन को विश्वविद्यालय में नए कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश देने का भी आग्रह किया गया है। इसके साथ ही अंतरिम राहत के तौर पर डॉ. मिश्रा को कुलपति के रूप में कार्य करने और इस पद से जुड़े निर्णय लेने से रोकने की मांग भी रखी गई है। 

इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ में हुई। अदालत ने राज्य शासन और अन्य संबंधित अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है। फिलहाल हाईकोर्ट ने याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। संबंधित पक्षों का जवाब आने के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश के प्रमुख कृषि शिक्षण संस्थानों में शामिल है। ऐसे में कुलपति की नियुक्ति और पद पर बने रहने से जुड़ा यह मामला विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और शैक्षणिक कामकाज के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी नजर राज्य शासन और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब तथा हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है।