महादेव सट्टा एप केस: सौरभ चंद्राकर की रायपुर कोर्ट में पेशी, CBI ने मांगी 10 दिन की रिमांड, गिरफ्तारी पर बचाव पक्ष की आपत्ति

करीब छह हजार करोड़ रुपये के कथित महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क के आरोपी सौरभ चंद्राकर को बुधवार को रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया गया। CBI ने पूछताछ के लिए दस दिन की कस्टोडियल रिमांड मांगी है, जबकि बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी की वैधता और ओमान से हुए प्रत्यर्पण की शर्तों पर सवाल उठाए हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सुनवाई लंच तक के लिए टाल दी।

Nov 4, 2026 - 14:21
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महादेव सट्टा एप केस: सौरभ चंद्राकर की रायपुर कोर्ट में पेशी, CBI ने मांगी 10 दिन की रिमांड, गिरफ्तारी पर बचाव पक्ष की आपत्ति

UNITED NEWS OF ASIA. रायपुर l छत्तीसगढ़ के चर्चित महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में बुधवार को बड़ी कानूनी कार्रवाई देखने को मिली। करीब छह हजार करोड़ रुपये के कथित सट्टेबाजी नेटवर्क के प्रमुख आरोपियों में शामिल सौरभ चंद्राकर को कड़ी सुरक्षा के बीच रायपुर की विशेष CBI अदालत में पेश किया गया। विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ठाकुर की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी CBI ने आरोपी से पूछताछ के लिए दस दिन की कस्टोडियल रिमांड मांगी। वहीं, बचाव पक्ष ने उसकी गिरफ्तारी की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे अवैध बताया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सुनवाई लंच तक के लिए टाल दी। लंच के बाद मामले में आगे की सुनवाई होनी है।

अदालत में CBI की ओर से अधिवक्ता चंदन सिंह ने पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से तुषार गिरी और शशांक मिश्रा पैरवी कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय यानी ED के वरिष्ठ अधिकारी भी अदालत में मौजूद रहे।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि CBI ने गिरफ्तारी से जुड़े जरूरी दस्तावेज अदालत के सामने प्रस्तुत नहीं किए हैं। बचाव पक्ष के वकीलों ने कहा कि एजेंसी की ओर से गिरफ्तारी की प्रक्रिया और उसके आधार को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने ओमान की अदालत द्वारा मंजूर किए गए प्रत्यर्पण की शर्तों का हवाला देते हुए दलील दी कि भारत को सौरभ चंद्राकर का प्रत्यर्पण ED के मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आधार पर मिला था। ऐसे में CBI के मामले में उसकी हिरासत मांगना प्रत्यर्पण की शर्तों से जुड़ा कानूनी सवाल खड़ा करता है।

CBI ने बचाव पक्ष की दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि जिन आदेशों का हवाला दिया जा रहा है, वे पुराने हैं। एजेंसी के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी नए आदेश के तहत की गई है, जिसमें किसी एक विशेष जांच एजेंसी तक कार्रवाई सीमित नहीं की गई है। इससे पहले दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में भी प्रत्यर्पण की शर्तों को लेकर बहस हुई थी। उस अदालत ने स्पष्ट किया था कि CBI मामले में मुकदमा चलाने की वैधता से जुड़े सवालों पर फैसला रायपुर की विशेष अदालत करेगी। दिल्ली की अदालत ने केवल आरोपी को रायपुर ले जाने के लिए दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मंजूर की थी।

CBI की टीम एक नवंबर को सौरभ चंद्राकर को ओमान के मस्कट से भारत लेकर आई थी। इसके बाद दो नवंबर को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मिली। तीन नवंबर को CBI की टीम उसे दिल्ली से रायपुर लेकर पहुंची और बुधवार को विशेष अदालत में पेश किया गया।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ चंद्राकर वर्ष 2023 से दुबई में रह रहा था और उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी था। ओमान में आठ जुलाई 2026 को उसकी गिरफ्तारी हुई थी। प्रत्यर्पण की प्रक्रिया के दौरान भारत और UAE की ओर से अलग-अलग अनुरोध किए गए थे। आठ अक्टूबर को मस्कट कोर्ट ऑफ अपील ने भारत के अनुरोध को प्राथमिकता देने का फैसला सुनाया। चंद्राकर ने वानुअतु की नागरिकता होने का दावा भी किया था, लेकिन ओमान की अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में छत्तीसगढ़ सरकार ने जांच के लिए 13 FIR CBI को सौंपी थीं। एजेंसी दो मामलों में आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। ED भी कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि सट्टेबाजी से प्राप्त रकम को विभिन्न बैंक खातों और हवाला नेटवर्क के माध्यम से इधर-उधर किया गया। इस नेटवर्क के संचालन, विदेशों में मौजूद कंपनियों और कथित आर्थिक लेन-देन की भी जांच की जा रही है।

भिलाई से जुड़े सौरभ चंद्राकर का नाम इस कथित अंतरराष्ट्रीय सट्टेबाजी नेटवर्क के प्रमुख आरोपियों में शामिल है। अब रायपुर की विशेष CBI अदालत में होने वाली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। CBI उससे नेटवर्क के संचालन, पैसों के लेन-देन और कथित सहयोगियों के संबंध में पूछताछ करना चाहती है। फिलहाल दस दिन की रिमांड पर फैसला आना बाकी है। अदालत का आदेश तय करेगा कि CBI को आरोपी की कस्टडी मिलती है या नहीं। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।