CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप की जांच, केरल विजिलेंस को मिले नए निर्देश

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ केरल में करीब 20 साल पुराने कथित भ्रष्टाचार मामले को लेकर विजिलेंस जांच आगे बढ़ाई जा रही है। आरोप है कि वर्ष 2006 में केरल के लोक निर्माण विभाग के सचिव रहते हुए उन्होंने सड़क निर्माण परियोजना के भुगतान के बदले दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। यह आरोप कोल्लम के ठेकेदार साजन ने लगाया है। फिलहाल आरोपों की जांच होनी है और इन्हें साबित नहीं माना जा सकता।

Nov 4, 2026 - 13:44
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CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने के आरोप की जांच, केरल विजिलेंस को मिले नए निर्देश

UNITED NEWS OF ASIA. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ करीब 20 साल पुराने कथित रिश्वत मामले को लेकर केरल में विजिलेंस जांच का मामला फिर चर्चा में है। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (VACB) को इस मामले में सामने आए नए आरोपों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। आरोप है कि वर्ष 2006 में केरल के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव रहते हुए ज्ञानेश कुमार ने सड़क निर्माण परियोजना के बकाया भुगतान जारी करने के बदले दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी। हालांकि, यह फिलहाल शिकायतकर्ता के आरोप हैं, जिनकी जांच की जानी है। 

यह मामला केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) के तहत सड़क निर्माण और उन्नयन कार्य से जुड़ा है। उस समय ज्ञानेश कुमार केरल में लोक निर्माण विभाग के सचिव थे। कोल्लम जिले के चदयमंगलम निवासी ठेकेदार साजन ने आरोप लगाया है कि परियोजना से जुड़े करीब 17 करोड़ रुपये के बिल इंजीनियरों की ओर से मंजूर किए जा चुके थे, लेकिन भुगतान के चेक जारी नहीं किए जा रहे थे। साजन का दावा है कि मलेशियाई कंपनी PATI-BEL के प्रोजेक्ट मैनेजर ली सी बीन ने उन्हें बताया था कि भुगतान जारी करने के लिए दो करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई है। 

कायतकर्ता के अनुसार, भुगतान में देरी के कारण कंपनी, उसके ठेकेदारों और कर्मचारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया था। साजन ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित रिश्वत मांग और भुगतान में देरी के चलते कंपनी के मलेशियाई इंजीनियर ली सी बीन मानसिक तनाव में आ गए थे। वर्ष 2006 में उन्होंने मलेशिया में आत्महत्या कर ली थी। साजन का दावा है कि ली ने अपने सुसाइड नोट में भी कथित भ्रष्टाचार और अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख किया था। इन दावों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। 

मामले में वर्ष 2006 में भी विजिलेंस जांच शुरू हुई थी, लेकिन बाद में आरोपों को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के आधार पर जांच बंद कर दी गई थी। अब नए सिरे से शिकायत सामने आने के बाद मामले की दोबारा पड़ताल की जा रही है। शिकायतकर्ता साजन ने आरोप लगाया है कि पिछली जांच में उनका और अन्य संबंधित लोगों का बयान दर्ज नहीं किया गया था। उन्होंने जांच एजेंसी को संबंधित गवाहों और दस्तावेजों की जानकारी उपलब्ध कराने की बात भी कही है। 

डिया रिपोर्टों के मुताबिक, विजिलेंस विभाग ने शुरुआती जांच के बाद औपचारिक मामला दर्ज करने के लिए गृह विभाग से अनुमति मांगी थी। कानूनी राय मिलने के बाद गृह मंत्री ने आगे की कार्रवाई को मंजूरी दी है। अब विजिलेंस एजेंसी शिकायत में लगाए गए आरोपों, पुराने रिकॉर्ड, भुगतान से जुड़े दस्तावेजों और संभावित गवाहों की जानकारी की जांच करेगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित रिश्वत मांग और भुगतान रोकने के आरोपों में कितनी सच्चाई है। 

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब देशभर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल इस प्रक्रिया के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, केरल में शुरू की गई विजिलेंस जांच और SIR को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद को अलग-अलग घटनाक्रम के रूप में देखना जरूरी है।

फिलहाल ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगाए गए रिश्वत मांगने के आरोप साबित नहीं हुए हैं। जांच एजेंसी की पड़ताल और सामने आने वाले दस्तावेजों के आधार पर ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस मामले में ज्ञानेश कुमार की ओर से आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है।