चीनी की बढ़ती कीमतों पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, कच्ची चीनी के आयात नियम बदले

देश में चीनी की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। TRQ के तहत आयात की जाने वाली कच्ची चीनी को अब निर्धारित समयसीमा में रिफाइनिंग और बिक्री करना अनिवार्य होगा। सरकार का उद्देश्य जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाते हुए बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार चीनी की औसत खुदरा कीमत एक महीने में करीब 29 प्रतिशत बढ़ी है।

Aug 25, 2026 - 11:33
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चीनी की बढ़ती कीमतों पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, कच्ची चीनी के आयात नियम बदले

UNITED NEWS OF ASIA. देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के आयात से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। सरकार का यह कदम बाजार में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जमाखोरी एवं कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है। टैरिफ रेट कोटा यानी TRQ के तहत आयात की जाने वाली कच्ची चीनी के संबंध में अब प्रत्येक खेप के लिए अलग समयसीमा निर्धारित की जाएगी। आयात की गई कच्ची चीनी की तय अवधि के भीतर रिफाइनिंग और बिक्री करना अनिवार्य होगा।

सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के TRQ आयात से जुड़े नियमों में संशोधन किया है। पहले आयातित कच्ची चीनी की बिक्री के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक की एक समान अंतिम समयसीमा निर्धारित थी, लेकिन अब प्रत्येक खेप के लिए अलग-अलग समयसीमा लागू होगी। इस बदलाव का उद्देश्य आयातित चीनी को लंबे समय तक रोककर रखने की संभावनाओं को कम करना और बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखना है।

चीनी की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी देखने को मिली है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत सोमवार को 63.05 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जबकि एक महीने पहले यह कीमत 48.73 रुपये प्रति किलोग्राम थी। इस तरह एक महीने के दौरान चीनी की औसत खुदरा कीमत में करीब 29 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। कुछ बाजारों में चीनी की कीमत 62 से 63 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है, जबकि अधिकतम खुदरा मूल्य 75 रुपये प्रति किलोग्राम तक बताया गया है।

चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे उत्पादन से जुड़ी चुनौतियों के साथ जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसे कारकों का भी उल्लेख किया जा रहा है। मौसम संबंधी परिस्थितियों का असर गन्ने के उत्पादन पर पड़ा है, जिससे चीनी उत्पादन प्रभावित होने की बात सामने आई है। वहीं सरकार का कहना है कि आगामी त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के अनुसार देश में चीनी की वार्षिक आवश्यकता करीब 280 लाख टन है, जबकि वर्तमान में 20 से 25 लाख टन से अधिक अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध है। सरकार उत्पादन और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। सरकार द्वारा आयात नियमों में किया गया बदलाव इसी निगरानी और बाजार में आपूर्ति को संतुलित रखने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।

नए नियमों के तहत आयातित कच्ची चीनी को निर्धारित अवधि में रिफाइन कर बाजार में उतारने पर जोर दिया गया है। इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि चीनी की खुदरा कीमतों में तत्काल कितनी कमी आएगी, यह बाजार में वास्तविक आपूर्ति, उत्पादन और मांग की स्थिति पर निर्भर करेगा। केंद्र सरकार का प्रयास है कि पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहे और आवश्यक वस्तु की कीमतों में अनावश्यक वृद्धि को नियंत्रित किया जा सके।