कांगेर घाटी में NH-30 के चौड़ीकरण की प्रक्रिया तेज, द्वितीय चरण की वन स्वीकृति के लिए केंद्र को भेजा प्रस्ताव

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की पहल से कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से गुजरने वाले NH-30 के 6.010 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। 8.386 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को प्रथम चरण की सशर्त सैद्धांतिक स्वीकृति मिल चुकी है और शर्तों के अनुपालन के बाद द्वितीय चरण की अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

Aug 25, 2026 - 11:57
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कांगेर घाटी में NH-30 के चौड़ीकरण की प्रक्रिया तेज, द्वितीय चरण की वन स्वीकृति के लिए केंद्र को भेजा प्रस्ताव

UNITED NEWS OF ASIA. बस्तर में सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने और आम नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन उपलब्ध कराने की दिशा में NH-30 के महत्वपूर्ण हिस्से के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण की प्रक्रिया तेज हो गई है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप की पहल से कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र से होकर गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-30 के 6.010 किलोमीटर हिस्से की परियोजना अब महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। इस परियोजना के लिए 8.386 हेक्टेयर वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग का प्रस्ताव है, जिसे प्रथम चरण की सशर्त सैद्धांतिक स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है। अब निर्धारित शर्तों के अनुपालन के बाद द्वितीय चरण की अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।

जगदलपुर-सुकमा-कोंटा मार्ग के अंतर्गत NH-30 के किलोमीटर 25.530 से 31.540 तक के हिस्से का उन्नयन प्रस्तावित है। यह सड़क बस्तर के दक्षिणी हिस्से की कनेक्टिविटी के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण से जगदलपुर से सुकमा और कोंटा की ओर आने-जाने वाले लोगों को बेहतर और सुरक्षित मार्ग मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही क्षेत्र में प्रशासनिक पहुंच, व्यापारिक गतिविधियों और पर्यटन को भी लाभ मिलने की संभावना है।

भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, नागपुर ने 13 अक्टूबर 2025 को परियोजना के लिए प्रथम चरण की सशर्त सैद्धांतिक स्वीकृति दी थी। इसके बाद स्वीकृति में निर्धारित वन एवं पर्यावरण संबंधी शर्तों को पूरा करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। प्रभारी अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक भू-प्रबंध द्वारा 23 जून 2026 को शर्तों के अनुपालन से संबंधित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। इसके आधार पर छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 8 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार के नवा रायपुर स्थित उप कार्यालय को पत्र भेजकर द्वितीय चरण की स्वीकृति जारी करने का अनुरोध किया। इसके बाद 10 जुलाई 2026 को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख के कार्यालय से भी आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाई गई।

परियोजना के तहत वन भूमि के उपयोग के बदले निर्धारित क्षतिपूरक वनीकरण और अतिरिक्त क्षतिपूरक वनीकरण की राशि भी वित्तीय वर्ष 2025-26 की निर्धारित दर के अनुसार जमा की जा चुकी है। अंतिम स्वीकृति से पहले निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत परियोजना एजेंसी आवश्यक संसाधन जुटाने और अनुमत प्रारंभिक तैयारियां आगे बढ़ा सकेगी। हालांकि ब्लैक टॉपिंग सहित स्थायी और पूर्ण निर्माण कार्य अंतिम वन स्वीकृति मिलने के बाद ही किए जा सकेंगे।

कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान बस्तर और छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर है। ऐसे में सड़क निर्माण के साथ वन, वन्यजीव और जैव-विविधता संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य सरकार का उद्देश्य विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए परियोजना को आगे बढ़ाना है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर के विकास को गति देने के लिए बेहतर सड़क संपर्क को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि NH-30 के संबंधित हिस्से का उन्नयन क्षेत्र के नागरिकों के लिए सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। उन्होंने कहा कि कांगेर घाटी की प्राकृतिक संपदा, वन्यजीव और जैव-विविधता का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी संतुलित दृष्टिकोण के साथ सड़क परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। अंतिम वन स्वीकृति मिलने के बाद परियोजना के निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद है, जिससे बस्तर की कनेक्टिविटी और सड़क अधोसंरचना को और मजबूती मिलेगी।