भोपाल में बीजेपी की पदयात्रा पर गरमाई सियासत, उमंग सिंघार ने व्यापारियों और स्कूली बच्चों की परेशानी को लेकर उठाए सवाल
भोपाल में त्योहारी सीजन के दौरान बीजेपी की ‘अराजकता हटाओ लोकतंत्र बचाओ’ पदयात्रा को लेकर सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बाजारों से यात्रा निकालने पर व्यापारियों, आम नागरिकों और स्कूली बच्चों को होने वाली संभावित परेशानी का मुद्दा उठाते हुए बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।
UNITED NEWS OF ASIA. मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में त्योहारी सीजन के बीच भारतीय जनता पार्टी की पदयात्रा को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। बीजेपी की ओर से निकाली जा रही ‘अराजकता हटाओ लोकतंत्र बचाओ’ पदयात्रा पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बीजेपी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। सिंघार का कहना है कि जिस पार्टी के नेता पहले कांग्रेस की रैलियों के दौरान व्यापारियों को होने वाले नुकसान का मुद्दा उठाते थे, वही पार्टी अब त्योहारों के समय भोपाल के प्रमुख बाजारों और व्यस्त रास्तों से पदयात्रा निकाल रही है।
उमंग सिंघार ने अपनी पोस्ट में कहा कि दिल्ली में कांग्रेस की महारैली के दौरान बीजेपी नेताओं ने व्यापारियों के कारोबार प्रभावित होने की चिंता जताई थी। उस समय रैली के कारण बाजारों में होने वाली परेशानी को लेकर सवाल उठाए गए थे। लेकिन अब भोपाल में त्योहारी सीजन के दौरान बीजेपी की पदयात्रा को लेकर वही चिंता दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने इसे बीजेपी का दोहरा चरित्र बताते हुए पूछा कि क्या अब भोपाल के व्यापारियों को होने वाले नुकसान की चिंता नहीं है?
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि त्योहारों के दौरान बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे समय में प्रमुख बाजारों और व्यस्त मार्गों पर राजनीतिक पदयात्रा निकलने से यातायात प्रभावित हो सकता है। इससे व्यापारियों के कारोबार पर असर पड़ने के साथ ही आम नागरिकों को भी आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, पदयात्रा के कारण वास्तविक रूप से कितना व्यावसायिक नुकसान हुआ है, इस संबंध में फिलहाल कोई आंकड़ा सामने नहीं आया है।
उमंग सिंघार ने स्कूली बच्चों की परेशानी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि पदयात्रा के मद्देनजर कई स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी है। उन्होंने सवाल किया कि राजनीतिक कार्यक्रमों के कारण बच्चों की पढ़ाई और आम नागरिकों की दिनचर्या प्रभावित क्यों होनी चाहिए? सिंघार ने सरकार से जवाब मांगा कि जब दिल्ली में कांग्रेस की रैली के दौरान व्यापारियों की चिंता जताई जा रही थी, तो भोपाल में बीजेपी की पदयात्रा के दौरान व्यापारियों और विद्यार्थियों की परेशानी को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है?
सिंघार ने अपने बयान में मध्यप्रदेश की कानून-व्यवस्था और हालिया घटनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने बालाघाट, भागीरथपुरा, सागर और देवास की घटनाओं का हवाला देते हुए बीजेपी नेताओं और मंत्रियों पर निशाना साधा। उनका आरोप है कि इन स्थानों पर हुई घटनाओं और लोगों की मौत के मामलों में सरकार की व्यवस्थाओं तथा प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर बीजेपी नेताओं में वास्तव में जनता के प्रति संवेदनशीलता है, तो उन्हें इन स्थानों पर जाकर प्रभावित लोगों की समस्याओं पर भी ध्यान देना चाहिए।
बीजेपी की पदयात्रा को लेकर उठे इन सवालों ने प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। एक ओर बीजेपी अपने अभियान के जरिए राजनीतिक और लोकतांत्रिक मुद्दों को उठाने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इसे आम जनता की परेशानियों से जोड़कर सरकार को घेर रही है।
अब इस पूरे मामले में प्रशासन की यातायात व्यवस्था, बाजारों में सुरक्षा और आम नागरिकों की सुविधा को लेकर उठाए गए सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं। त्योहारों के दौरान बाजारों में भीड़ और यातायात का दबाव पहले से ही अधिक रहता है। ऐसे में किसी भी बड़े राजनीतिक कार्यक्रम के आयोजन के दौरान प्रशासन के लिए यह जरूरी है कि व्यापारियों, ग्राहकों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की आवाजाही प्रभावित न हो। फिलहाल उमंग सिंघार के आरोपों और सवालों के बीच भोपाल की इस पदयात्रा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है।