विवाद का केंद्र एक 30 सेकंड का ब्लैक एंड व्हाइट विज्ञापन है, जिसकी प्रस्तुति और दृश्य 2024 के ट्रंप चुनाव अभियान के एक विज्ञापन से काफी मिलते-जुलते बताए जा रहे हैं। नए विज्ञापन में ट्रंप को एक गलियारे में चलते हुए दिखाया गया है और बैकग्राउंड में उनकी आवाज सुनाई देती है। विज्ञापन के अंत में इसे अमेरिकी सरकार की ओर से भुगतान किया गया बताया गया है।
विज्ञापन में ट्रंप ‘ग्लोबलिस्ट’, ‘वारमॉन्गर्स’ और ‘डीप स्टेट’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ कड़ा संदेश देते नजर आते हैं। यह भाषा 2024 के उनके चुनावी संदेशों से समानता को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है। मीडिया खर्च पर नजर रखने वाली संस्था AdImpact के अनुसार, इस नए विज्ञापन पर खर्च करीब 3.19 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका था। विज्ञापन टीवी कार्यक्रमों और खेल प्रसारण के दौरान भी प्रसारित किया गया।
इससे पहले ट्रंप प्रशासन की ओर से कुछ अन्य सरकारी विज्ञापन भी प्रसारित किए गए हैं। इनमें एक विज्ञापन में ट्रंप को कम्युनिज्म के खिलाफ बोलते हुए दिखाया गया और स्क्रीन पर टैक्स कटौती, अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े संदेश प्रदर्शित किए गए। एक अन्य विज्ञापन में माउंट रशमोर के दृश्य और ट्रंप के भाषण के अंश शामिल किए गए। इन विज्ञापनों पर भी सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे हैं।
डेमोक्रेट सांसदों ने इन विज्ञापनों को लेकर व्हाइट हाउस से स्पष्टीकरण मांगा है। उनका तर्क है कि सरकारी धन का इस्तेमाल किसी राष्ट्रपति या राजनीतिक संदेश को बढ़ावा देने के लिए नहीं होना चाहिए। वहीं कुछ रिपब्लिकन सांसदों ने भी सरकारी पैसे से सार्वजनिक अधिकारियों की छवि को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों पर आपत्ति जताई है। रिपब्लिकन सीनेटर जॉन कैनेडी ने सार्वजनिक धन से किसी सार्वजनिक अधिकारी के निजी प्रचार पर खर्च किए जाने को लेकर सवाल उठाया है।
व्हाइट हाउस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि विज्ञापन चुनावी प्रचार नहीं हैं। प्रशासन के अनुसार, ट्रंप फिलहाल किसी चुनाव में उम्मीदवार के तौर पर मतपत्र पर नहीं हैं और विज्ञापनों में वोट मांगने या कार्रवाई के लिए कोई सीधा आह्वान नहीं किया गया है। व्हाइट हाउस ने पूर्व राष्ट्रपतियों के प्रशासन द्वारा नीतियों और सार्वजनिक अभियानों से जुड़े विज्ञापनों का उदाहरण भी दिया है।
इस विवाद का एक कानूनी पहलू भी है। अमेरिकी सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़ी संघीय व्यवस्था सरकारी फंड से कुछ प्रकार के ‘publicity or propaganda’ पर प्रतिबंध लगाती है। आलोचक इन विज्ञापनों को इसी संदर्भ में देख रहे हैं, जबकि प्रशासन इन्हें जनसेवा संदेश मानता है। अभी यह विवाद राजनीतिक और कानूनी बहस के स्तर पर है और विज्ञापनों को लेकर अंतिम कानूनी निष्कर्ष सामने नहीं आया है।