दरअसल, पेपर लीक के मुद्दे को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक नारे और गालियां दिए जाने को लेकर बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया दी थी। इसी दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों और Gen-Z को लेकर ‘गटर जनरेशन’ और ‘गटर लेवल के लोग’ जैसी टिप्पणी की थी। कंगना के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रिया सामने आई।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कंगना रनौत के बयान पर अपनी असहमति जाहिर करते हुए कहा कि वह इस तरह की भाषा को सही नहीं मानते। उन्होंने कहा कि किसी एक संगठन या पार्टी को गलत ठहराने के लिए पूरी जनरेशन को गलत कहना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, किसी व्यक्ति के बयान या व्यवहार के आधार पर पूरी पीढ़ी के बारे में धारणा बनाना सही तरीका नहीं है।
चिराग पासवान ने कहा कि समय-समय पर कई लोग ऐसी उटपटांग बातें करते हैं, जिनसे वह खुद भी सहमत नहीं होते। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वह कई बार सांप्रदायिकता से जुड़ी भाषा सुनते हैं, जिसका वह कतई पक्षधर नहीं हैं। इसी तरह सावन के महीने में कुछ नेता मांस की बिक्री रोकने या दुकानों पर नेम प्लेट लगाने जैसी मांगें करते हैं, लेकिन वह इन विचारों का भी समर्थन नहीं करते।
चिराग पासवान ने सवाल उठाया कि किसी एक व्यक्ति के बयान से क्या पूरे सिस्टम को नकार दिया जाए? उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अलग-अलग नेताओं के अलग-अलग विचार हो सकते हैं, लेकिन किसी एक व्यक्ति की टिप्पणी को पूरे सिस्टम या पूरी राजनीतिक व्यवस्था से जोड़ना उचित नहीं है।
कंगना रनौत के बयान पर चिराग ने कहा कि वह इसे गलत मानते हैं। उन्होंने कहा कि एक संगठन को बुरा बोलते-बोलते पूरी जनरेशन को उसी नजर से देखना सही नहीं है। किसी राजनीतिक दल या संगठन की आलोचना के लिए पूरी पीढ़ी को निशाना बनाना उचित नहीं कहा जा सकता।
चिराग पासवान ने यह भी कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दलों में नेताओं की ओर से दिए गए बयानों को लेकर पार्टी स्तर पर उन्हें टोका जाता है। उन्होंने कहा कि वह अपनी पार्टी में ऐसी बातों पर नेताओं को टोकते हैं और बीजेपी भी अपनी पार्टी के नेताओं को लेकर अपनी व्यवस्था के अनुसार कार्रवाई या प्रतिक्रिया देती है।
उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति इतने बड़े संगठन का हिस्सा होता है तो हर व्यक्ति के बयान की व्यक्तिगत जिम्मेदारी पूरे संगठन पर डालना उचित नहीं है। नेताओं की व्यक्तिगत टिप्पणियों और पार्टी के आधिकारिक रुख के बीच अंतर समझना जरूरी है।
कंगना रनौत और चिराग पासवान के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जहां कंगना की टिप्पणी को लेकर Gen-Z और प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग में नाराजगी देखी जा रही है, वहीं चिराग पासवान की प्रतिक्रिया ने इस मुद्दे को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है।