Form-7 को लेकर सियासी घमासान, ओवैसी का आरोप- मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश

वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि Form-7 के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है। बीजेपी ने आरोपों को खारिज करते हुए ओवैसी से सबूत संबंधित अधिकारियों के सामने पेश करने की मांग की है।

Oct 5, 2026 - 09:26
Oct 5, 2026 - 09:27
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Form-7 को लेकर सियासी घमासान, ओवैसी का आरोप- मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश

UNITED NEWS OF ASIA. वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR को लेकर देश में सियासी घमासान लगातार बढ़ता जा रहा है। अब Form-6 के बाद Form-7 को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि Form-7 के जरिए मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए ओवैसी से ठोस सबूत पेश करने की मांग की है।

ओवैसी ने शनिवार रात हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग और तेलंगाना के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से Form-7 के जरिए दाखिल किए जा रहे आवेदनों की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि हर Form-7 आवेदन की जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन कौन जमा कर रहा है।

AIMIM प्रमुख ने दावा किया कि हैदराबाद के मुशीराबाद इलाके में बीजेपी के एक बूथ लेवल एजेंट यानी BLA द्वारा मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए Form-7 जमा किए जाने का मामला सामने आया है। ओवैसी ने कहा कि यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाने की कोशिश की जा रही है तो चुनाव आयोग को संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

ओवैसी ने SIR की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए इसे गलत प्रक्रिया बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कथित तौर पर मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिशें जारी रहीं तो हैदराबाद में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने दिल्ली और मुंबई में हुए प्रदर्शनों से भी बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।

दरअसल, Form-7 का इस्तेमाल मौजूदा मतदाता सूची में किसी नाम को हटाने या किसी नाम को लेकर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। इसी प्रक्रिया को लेकर अब राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

वहीं, ओवैसी के आरोपों पर तेलंगाना बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता एनवी सुभाष ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि किसी संवैधानिक संस्था या चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप केवल सार्वजनिक बयानों के आधार पर साबित नहीं किए जा सकते। बीजेपी ने कहा कि यदि ओवैसी के पास कथित गड़बड़ी से जुड़े ठोस सबूत हैं तो उन्हें संबंधित अधिकारियों या उचित न्यायिक मंच के सामने पेश करना चाहिए।

बीजेपी की ओर से यह भी कहा गया कि सार्वजनिक रूप से आरोप लगाने के बजाय शिकायत के साथ प्रमाण प्रस्तुत किए जाने चाहिए, ताकि मामले की विधिवत जांच हो सके।

फिलहाल Form-7 को लेकर लगाए गए आरोपों और बीजेपी के जवाब के बीच राजनीतिक विवाद और तेज होता नजर आ रहा है। मामले में वास्तविक स्थिति क्या है, यह संबंधित चुनाव अधिकारियों की जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।