राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर ABPSS ने केंद्र सरकार से फिर की पहल, PMO में नया आवेदन

अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (ABPSS) ने राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष अपनी पहल फिर तेज की है। भारतीय प्रेस परिषद के जवाब से असंतुष्ट संगठन ने अपील दर्ज कराने के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय में नया आवेदन प्रस्तुत कर पूर्व सिफारिशों पर कार्रवाई और राष्ट्रीय कानून बनाने की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

Aug 20, 2026 - 13:01
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राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को लेकर ABPSS ने केंद्र सरकार से फिर की पहल, PMO में नया आवेदन

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l देशभर के पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति (ABPSS) ने केंद्र सरकार के समक्ष अपनी पहल को आगे बढ़ाया है। भारतीय प्रेस परिषद (PCI) के जवाब से असंतुष्ट संगठन ने अपील दर्ज कराने के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में दोबारा नया आवेदन प्रस्तुत किया है। संगठन ने केंद्र सरकार से पत्रकार सुरक्षा से संबंधित पूर्व सिफारिशों पर हुई कार्रवाई और वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

ABPSS के राष्ट्रीय संगठन महासचिव महफूज़ खान द्वारा उठाए गए इस विषय का उद्देश्य केवल पत्रकार सुरक्षा को लेकर पूर्व में किए गए प्रयासों और रिपोर्टों की जानकारी प्राप्त करना नहीं है, बल्कि उन सिफारिशों के आधार पर वर्तमान समय में ठोस एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराना है।

पूर्व में प्रस्तुत आवेदन संख्या PMOPG/E/2026/0143964 दिनांक 3 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय में दर्ज हुआ था। इस मामले में भारतीय प्रेस परिषद ने 17 अगस्त 2026 को जवाब दिया। PCI के उत्तर में बताया गया कि पत्रकार सुरक्षा के संबंध में वर्ष 2015 में रिपोर्ट तैयार की गई थी तथा पत्रकार सुरक्षा से जुड़े विधेयकों पर विचार करते हुए केंद्र सरकार को केंद्रीय कानून बनाने की सिफारिश की गई थी।

PCI के जवाब से असंतुष्ट ABPSS ने दायर की अपील

ABPSS के अनुसार, PCI के जवाब से यह स्पष्ट होता है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता का विषय नया नहीं है। इस संबंध में पूर्व में रिपोर्ट तैयार होने के साथ केंद्र सरकार को सिफारिश भी की जा चुकी है।

संगठन ने PCI के जवाब के बाद अपील संख्या MOIAB/E/A/26/0000386 दिनांक 18 अगस्त 2026 को प्रस्तुत की। अपील में स्पष्ट किया गया कि संगठन की मूल मांग केवल पूर्व रिपोर्ट या सिफारिशों की जानकारी हासिल करना नहीं थी। ABPSS जानना चाहता है कि देशभर के पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की दिशा में केंद्र सरकार वर्तमान में क्या ठोस कार्रवाई कर रही है।

PMO में फिर प्रस्तुत किया नया आवेदन

राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को दोबारा केंद्र सरकार के समक्ष रखते हुए ABPSS ने नया आवेदन भी प्रस्तुत किया है। नए आवेदन का Registration No. PMOPG/E/2026/0156778 है, जिसे 18 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय में प्राप्त किया गया।

आवेदन में केंद्र सरकार से वर्ष 2015 की पत्रकार सुरक्षा संबंधी रिपोर्ट और केंद्रीय कानून बनाने की पूर्व सिफारिशों पर अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है। साथ ही यह जानकारी भी मांगी गई है कि वर्तमान में राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर कोई प्रस्ताव, नीति, विधायी प्रक्रिया अथवा अन्य कार्रवाई विचाराधीन है या नहीं।

ABPSS ने कानून के संभावित प्रारूप और विधायी व्यवस्था को लेकर पत्रकार संगठनों, पत्रकार प्रतिनिधियों तथा अन्य संबंधित हितधारकों से आवश्यक परामर्श की प्रक्रिया शुरू करने पर भी विचार करने का अनुरोध किया है।

‘पत्रकारों की सुरक्षा लोकतंत्र से जुड़ा विषय’

महफूज़ खान ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के महत्वपूर्ण प्रहरी हैं। जनहित, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं, सामाजिक समस्याओं और आम जनता की आवाज को सामने लाने के दौरान पत्रकारों को कई बार धमकी, हिंसा, हमले और अन्य दबावों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में पत्रकारों की सुरक्षा केवल पत्रकार संगठनों का विषय नहीं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता, लोकतंत्र और जनहित से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

उन्होंने कहा कि ABPSS की मांग किसी सरकार, मंत्रालय या संस्था के विरोध में नहीं है। संगठन का उद्देश्य देशभर के पत्रकारों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना और स्वतंत्र एवं निर्भीक पत्रकारिता के लिए प्रभावी तथा स्थायी कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित कराना है।

ABPSS ने केंद्र सरकार से पूर्व सिफारिशों पर हुई कार्रवाई, वर्तमान स्थिति और आगे की प्रस्तावित कार्यवाही का स्पष्ट एवं तथ्यात्मक जवाब उपलब्ध कराने तथा राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

संगठन ने कहा है कि यदि अपेक्षित स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो संविधान एवं कानून के दायरे में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक जनजागरूकता अभियान, प्रतिनिधिमंडल, धरना तथा अन्य वैधानिक कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को आगे बढ़ाया जाएगा।

ABPSS का कहना है कि अब आवश्यकता केवल पूर्व प्रयासों का उल्लेख करने की नहीं, बल्कि उन प्रयासों के परिणाम, वर्तमान स्थिति और आगे की ठोस कार्ययोजना स्पष्ट करने की है। संगठन ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार इस विषय पर सकारात्मक एवं परिणामकारी कार्रवाई करेगी।