दोनों नेताओं ने अपना इस्तीफा छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज को भेजा है। इस्तीफे में उन्होंने संगठन की वर्तमान कार्यप्रणाली और जिला नेतृत्व की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
इस्तीफे में आरोप लगाया गया है कि जिले में पार्टी संगठन को मजबूत करने के बजाय कुछ ऐसे लोगों को कार्यकारिणी में प्रमुख स्थान दिया गया है, जो पार्टी की विचारधारा और संगठन के प्रति पूरी तरह समर्पित नहीं हैं। इसके कारण लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे जमीनी और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की लगातार अनदेखी की जा रही है।
दोनों नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि संगठन में पारदर्शिता की कमी है और कार्यकर्ताओं की राय को महत्व नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संगठन में कुछ लोगों को एक साथ दो-दो पद दिए गए हैं, जिससे कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष बढ़ रहा है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि जिले में कांग्रेस संगठन की कमान संभाल रहे जिलाध्यक्ष हरिहर यादव के नेतृत्व को लेकर कई कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। हालांकि इस मामले में अभी तक जिला नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इस्तीफा देने के बावजूद अस्मिता टोप्पो और लालसाय मिंज ने स्पष्ट किया है कि वे कांग्रेस पार्टी की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध हैं और भविष्य में भी पार्टी के लिए कार्य करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य संगठन को कमजोर करना नहीं, बल्कि संगठन के भीतर सुधार और पारदर्शिता की मांग करना है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते संगठन के भीतर उठ रहे असंतोष को दूर नहीं किया गया तो इसका असर आगामी चुनावी रणनीतियों पर भी पड़ सकता है। बलरामपुर जिला आदिवासी बहुल क्षेत्र माना जाता है और यहां संगठन की मजबूती राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व इस मामले को किस तरह से लेता है और संगठन में बढ़ते असंतोष को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है। राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम को कांग्रेस संगठन के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान के रूप में देखा जा रहा है।