बैठक में सरगुजा संभाग के जशपुर, बलरामपुर, अंबिकापुर, सूरजपुर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी और कोरिया जिलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने एक मंच पर आकर एकजुटता का परिचय दिया और सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
बैठक की शुरुआत मां सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर की गई। इसके बाद जशपुर जिले से आई कार्यकर्ताओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत कर सभी प्रतिनिधिमंडल और पदाधिकारियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कविता यादव ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि सभी कार्यकर्ता एक मंच और एक बैनर के नीचे आ जाएं, तो निश्चित रूप से उनकी मांगों को सरकार के सामने मजबूती से रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि कई बार छोटे-छोटे मुद्दों को लेकर अधिकारियों का दबाव और प्रताड़ना झेलनी पड़ती है, लेकिन सभी को एकजुट होकर इसका सामना करना चाहिए।
वहीं पुष्पा श्रेजल ने कहा कि सरकार को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भी संगठन अपनी मांगों को लेकर आगे बढ़ता है तो सबसे पहले पदाधिकारियों पर दबाव बनाया जाता है, इसलिए सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर निडरता के साथ अपने हक और अधिकार के लिए आगे आना होगा। उन्होंने विभाग द्वारा दिए जा रहे गुणवत्ताविहीन साड़ी वितरण पर भी सवाल उठाए और इसे स्वीकार न करने की बात कही।
बैठक में सेवानिवृत्त हो रहे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की स्थिति पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें न तो पेंशन मिलती है और न ही किसी प्रकार की आर्थिक सुरक्षा, जिससे उनका भविष्य अनिश्चित हो जाता है। इसलिए सरकार के सामने पेंशन की मांग प्रमुखता से रखने का निर्णय लिया गया। साथ ही सेवानिवृत्त होने वाली कार्यकर्ताओं के सम्मान में विशेष समारोह आयोजित करने का भी प्रस्ताव रखा गया।
भुनेश्वरी सिंह ने कहा कि सभी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होकर बैठना बेहद सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि अब सभी को एक राय होकर अपनी प्रमुख मांग नियमितिकरण को लेकर संघर्ष करना चाहिए। वहीं सुचिता मिश्रा ने इस बैठक को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि सभी संगठनों का एक मंच पर आना सकारात्मक संकेत है और इससे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की आवाज और मजबूत होगी।
बैठक में 21 सूत्रीय एजेंडा पर विस्तृत चर्चा की गई, जिसमें संगठनात्मक एकजुटता, हड़ताल और धरना प्रदर्शन में सामूहिक भागीदारी, नियमित बैठकें, व्हाट्सएप समूह बनाना, मीडिया के साथ समन्वय, सरकार और प्रशासन से मुलाकात, न्यायालय में याचिका दायर करने की संभावना तथा अन्य राज्यों के आंगनबाड़ी संगठनों से संपर्क जैसे विषय शामिल थे।
बैठक के अंत में सभी प्रतिनिधियों ने एक स्वर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के हक-अधिकार के लिए संगठित होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।