उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने “द स्टोरी ऑफ किंग भोरमदेव” पुस्तक का किया विमोचन

कवर्धा में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने लेखक रामप्रसाद बघेल की पुस्तक “द स्टोरी ऑफ किंग भोरमदेव” का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक भोरमदेव की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाएगी।

Feb 3, 2026 - 14:22
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उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने “द स्टोरी ऑफ किंग भोरमदेव” पुस्तक का किया विमोचन

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने विधायक कार्यालय कवर्धा में आयोजित कार्यक्रम में “द स्टोरी ऑफ किंग भोरमदेव – राजा भोरमदेव की कहानी” पुस्तक का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक के लेखक रामप्रसाद बघेल को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल साहित्यिक भविष्य की कामना की।

सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा वैश्विक मंच

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह पुस्तक जिले और प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि पुस्तक के माध्यम से भोरमदेव की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही यह रचना भोरमदेव की ख्याति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

दार्शनिक और आध्यात्मिक संदेश का समावेश

उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल राजा भोरमदेव के जीवन और शासनकाल का वर्णन नहीं करती, बल्कि इसमें मनुष्य, प्रकृति और चेतना के संतुलन की गूढ़ दार्शनिक अवधारणाओं को भी दर्शाया गया है। उन्होंने नागरिकों से पुस्तक पढ़कर उसके संदेश को जीवन में अपनाने का आग्रह किया।

पौराणिक और वैज्ञानिक कल्पना का अनोखा संगम

लेखक रामप्रसाद बघेल ने बताया कि पुस्तक की कथा एक प्राचीन रहस्यमयी काल से शुरू होती है, जब पृथ्वी पर आकाश से गिरे एक विशाल धूमकेतु के कारण प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। इसके साथ ही अंधकार से ऊर्जा प्राप्त करने वाले ड्रैगन जैसे घातक प्राणियों का प्रकट होना कहानी का प्रमुख आकर्षण है।

कथा का मुख्य पात्र कुरुगुरु भद्रदेव बैगा है, जो विज्ञान, अध्यात्म और प्रकृति के संतुलन को समझते हुए संकट से पृथ्वी को बचाने का प्रयास करता है। कहानी में यह भी बताया गया है कि ड्रैगनों के माथे पर चमकने वाला नीला चिह्न अंधकार से ऊर्जा प्राप्त करने वाला यंत्र होता है।

राजा-रानी की दिव्य शक्तियों का वर्णन

पुस्तक में राजा परसमनिधर देव और रानी नागमती की तपस्या तथा दिव्य वैज्ञानिक शक्तियों का भी उल्लेख किया गया है। राजा के पास पारस रत्न है, जो सूर्य ऊर्जा से जीवन को रूपांतरित करने की क्षमता रखता है, जबकि रानी नागमती के पास नागमणि यंत्र है, जो विष को निष्प्रभावी करने और पदार्थ को नष्ट करने की शक्ति रखता है।

प्रेम, चेतना और प्रकृति का संदेश

कहानी में राजा और रानी के प्रेम को विज्ञान, प्रकृति और चेतना के मिलन के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह कथा केवल युद्ध और संघर्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रेम, नियति और मानवीय संवेदनाओं का भी प्रभावशाली चित्रण करती है।

जनप्रतिनिधि और नागरिक रहे उपस्थित

कार्यक्रम में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विदेशीराम धुर्वे, संतोष पटेल, जनपद उपाध्यक्ष गणेश तिवारी, नंद श्रीवास, नरेंद्र मानिकपुरी, मनीराम साहू, अमर कुर्रे, प्रवीण शर्मा, जसबीर सालुजा, शैलेन्द्र उपाध्याय सहित कई जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे।