ऐसे कठिन समय में नगरी नगर पंचायत ने केवल आश्वासन नहीं दिए, बल्कि ठोस संकल्प के साथ काम करते हुए इस समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया। वर्षों से बंद पड़ी इरिगेशन नाली, जो केवल एक अधूरी परियोजना बनकर रह गई थी, उसे फिर से चालू करने का निर्णय लिया गया।
नगर पंचायत के अध्यक्ष बलजीत छाबड़ा, उपाध्यक्ष विकास बोहरा और पार्षदों के सामूहिक प्रयासों से यह संभव हो सका। इरिगेशन विभाग के साथ लगातार संवाद और समन्वय के बाद सोंढूर से पानी छोड़ने की स्वीकृति प्राप्त की गई।
इस पहल के तहत सोंढूर से छोड़ा गया पानी नगरी के वार्ड क्रमांक 13 स्थित गुढ़ियारी तालाब तक पहुंचा, जिससे तालाब का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। एक सप्ताह तक लगातार मेहनत, नालियों की सफाई और टीमवर्क के कारण यह कार्य सफल हो सका। अब इस तालाब के भर जाने के बाद वार्ड क्रमांक 14 स्थित पुरानी बस्ती दरियारा तालाब को भी इसी नाली के माध्यम से भरा जाएगा, जिससे और अधिक लोगों को राहत मिलेगी।
इस कार्य के पूरा होने के बाद स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है। जिन तालाबों के सूख जाने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, अब उनमें पानी भरने से न केवल दैनिक जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि सामाजिक और पारंपरिक गतिविधियां भी सुचारू रूप से संपन्न हो सकेंगी।
अध्यक्ष बलजीत छाबड़ा ने स्पष्ट रूप से कहा कि जनता की सुविधा उनकी पहली प्राथमिकता है और हर साल इरिगेशन के माध्यम से तालाबों को भरने की योजना पर काम किया जाएगा। उनका उद्देश्य है कि नगरी क्षेत्र में पानी की कमी कभी न होने पाए और हर नागरिक को पर्याप्त जल उपलब्ध हो सके।
इस जनहितकारी कार्य में उपाध्यक्ष विकास बोहरा, पार्षद अश्वनी निषाद, शंकर देव, यश करण पटेल, स्वच्छता निरीक्षक पुष्कर पाटील सहित नगर पंचायत की पूरी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी के समर्पित प्रयासों ने इस कार्य को सफल बनाया।
यह पहल केवल तालाबों में पानी भरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास को भी मजबूत करती है। यह दर्शाती है कि जब नेतृत्व मजबूत हो और नीयत साफ हो, तो किसी भी समस्या का समाधान संभव है। आने वाले समय में अन्य तालाबों को भी भरने की योजना बनाई जा रही है, जिससे नगरी क्षेत्र को पूरी तरह जल संकट से मुक्त किया जा सके।