अमेरिका-ईरान शांति समझौते का दावा: 14 शर्तों पर सहमति, 19 जून को जिनेवा में हो सकते हैं हस्ताक्षर
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है। दावा किया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच 14 प्रमुख शर्तों पर सहमति बनी है और 19 जून को जिनेवा में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। समझौते में प्रतिबंध हटाने, फ्रीज फंड जारी करने, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच 14 महत्वपूर्ण शर्तों पर सहमति बनी है और 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो इससे पश्चिम एशिया की भू-राजनीति, वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित समझौते में ईरान पर लगाए गए तेल, पेट्रोकेमिकल और निर्यात संबंधी प्रतिबंधों को हटाने का प्रावधान शामिल है। इसके अलावा विदेशों में फ्रीज किए गए लगभग 24 अरब डॉलर के ईरानी फंड को जारी करने की बात कही गई है। साथ ही अमेरिका और उसके सहयोगी देशों द्वारा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए लगभग 300 अरब डॉलर के निवेश और विकास पैकेज पर भी चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।
समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने और समुद्री व्यापार को सामान्य करने की दिशा में भी कदम उठाए जाने का दावा किया गया है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसके खुलने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को राहत मिल सकती है।
प्रस्तावित शर्तों में यह भी शामिल बताया जा रहा है कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत परमाणु हथियार विकसित नहीं करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराएगा। वहीं अमेरिका क्षेत्र में सैन्य विस्तार नहीं करने और बातचीत के दौरान नए प्रतिबंध लागू नहीं करने पर सहमत हो सकता है।
रिपोर्टों के अनुसार जिनेवा में होने वाले संभावित हस्ताक्षर समारोह में ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची भाग ले सकते हैं। अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के शामिल होने की संभावना जताई गई है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्वयं भी इस अवसर पर उपस्थित हो सकते हैं।
हालांकि इस प्रस्तावित समझौते को लेकर आधिकारिक स्तर पर सभी पक्षों की अंतिम पुष्टि और विस्तृत दस्तावेज सार्वजनिक होना अभी बाकी है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब 19 जून पर टिकी हैं, क्योंकि यह समझौता पश्चिम एशिया में स्थिरता, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो इससे क्षेत्रीय तनाव कम होने, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और वैश्विक बाजारों में सकारात्मक संकेत जाने की संभावना है।