लेमन ग्रास की खेती से आत्मनिर्भर बन रहीं जीपीएम की महिलाएं, ‘लखपति दीदी’ बनने की राह पर बढ़े कदम

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम अमारू में बिहान योजना से जुड़ी 10 महिला स्वसहायता समूहों ने करीब 20 एकड़ में लेमन ग्रास की सामूहिक खेती शुरू की है। महिलाएं लेमन ग्रास से तेल निकालकर बाजार और औषधीय संस्थानों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही हैं। सरकारी योजनाओं से मिले आर्थिक सहयोग, प्रशिक्षण और बैंक लिंकेज के जरिए ग्रामीण महिलाएं खेती के साथ अन्य आजीविका गतिविधियों से भी जुड़ रही हैं।

Oct 5, 2026 - 13:37
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लेमन ग्रास की खेती से आत्मनिर्भर बन रहीं जीपीएम की महिलाएं, ‘लखपति दीदी’ बनने की राह पर बढ़े कदम

UNITED NEWS OF ASIA. गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम अमारू में लेमन ग्रास की खेती ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार का नया माध्यम बन रही है। बिहान योजना से जुड़ी महिला स्वसहायता समूहों की दीदियां करीब 20 एकड़ भूमि पर सामूहिक रूप से लेमन ग्रास की खेती कर रही हैं। महिलाओं का यह प्रयास उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ग्राम अमारू में जनपद पंचायत पेंड्रा के अंतर्गत गठित 10 महिला स्वसहायता समूह इस पहल से जुड़े हैं। इनमें ज्योति महिला समूह, महामाया समूह, जय संतोषी माता समूह और हनी समूह सहित अन्य समूह शामिल हैं। महिलाओं ने सामूहिक प्रयास से उपलब्ध भूमि का उपयोग करते हुए लेमन ग्रास की खेती शुरू की है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में स्थानीय संसाधनों के माध्यम से स्थायी आजीविका का अवसर तैयार करना है।

लेमन ग्रास एक सुगंधित और औषधीय पौधा है, जिससे तेल तैयार किया जाता है। अमारू की महिलाएं खेती के बाद लेमन ग्रास से तेल निकालकर खुले बाजार और औषधीय संस्थानों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही हैं। इस तेल का उपयोग चाय, इत्र और विभिन्न औषधीय उत्पादों में किया जाता है। उत्पादन के साथ प्रसंस्करण और बाजार से सीधा जुड़ाव होने पर महिलाओं की आय बढ़ने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

ज्योति महिला समूह की सदस्य गायत्री काशीपुरी के अनुसार उनके समूह की 11 सदस्य पादप औषधि बोर्ड के सहयोग से लेमन ग्रास की खेती कर रही हैं। समूह की महिलाएं भविष्य में इस खेती का विस्तार करना चाहती हैं। उनका कहना है कि लेमन ग्रास से तेल निकालकर बाजार और औषधीय संस्थानों में बेचने की योजना है, जिससे समूह की महिलाओं को अतिरिक्त आय का साधन मिल सके।

महिलाओं के अनुसार बिहान योजना से जुड़ने के बाद उनके लिए आजीविका के कई नए रास्ते खुले हैं। महामाया समूह की सुशीला भानू, जय संतोषी माता समूह की पाबरिया भानू और हनी समूह की पूजा ध्रुव ने बताया कि समूहों को 15 हजार रुपये की चक्रीय राशि, 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश निधि और बैंक लिंकेज का लाभ मिला है। आर्थिक सहयोग और समूह की सामूहिक शक्ति से महिलाएं अलग-अलग स्वरोजगार गतिविधियों से जुड़ रही हैं।

लेमन ग्रास की खेती के साथ महिलाएं सेंटरिंग प्लेट व्यवसाय, टेंट हाउस, सब्जी बाड़ी, किराना दुकान, बकरी पालन और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियां भी कर रही हैं। इससे परिवार की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है और महिलाओं में आर्थिक निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी मजबूत हो रहा है।

ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनकी वार्षिक आय बढ़ाकर ‘लखपति दीदी’ बनाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमारू की महिलाएं सामूहिक खेती, सरकारी योजनाओं के सहयोग और बाजार से जुड़ाव के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। लेमन ग्रास की खेती अब उनके लिए केवल एक कृषि गतिविधि नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की उम्मीद बनती जा रही है।