छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री का बदला नियम, 1 अक्टूबर से 49 प्रीमियम दुकानों में सिर्फ कैशलेस भुगतान

छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग ने प्रीमियम शराब दुकानों पर बिक्री व्यवस्था में बदलाव किया है। 1 अक्टूबर 2026 से प्रदेश की सभी 49 प्रीमियम शराब दुकानों में केवल कैशलेस भुगतान के जरिए बिक्री होगी। विभाग का उद्देश्य ओवररेटिंग की शिकायतों पर नियंत्रण और शराब बिक्री व भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है।

Sep 14, 2026 - 17:03
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छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री का बदला नियम, 1 अक्टूबर से 49 प्रीमियम दुकानों में सिर्फ कैशलेस भुगतान

UNITED NEWS OF ASIA. छत्तीसगढ़ में शराब बिक्री की व्यवस्था को लेकर आबकारी विभाग ने नया नियम लागू करने का फैसला किया है। प्रदेश की सभी 49 प्रीमियम शराब दुकानों में अब नकद भुगतान की व्यवस्था खत्म कर कैशलेस बिक्री को अनिवार्य किया जाएगा। यह नई व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार प्रीमियम दुकानों पर शराब की खरीद के लिए ग्राहकों को डिजिटल माध्यम से भुगतान करना होगा। इस बदलाव का उद्देश्य बिक्री प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ ओवररेटिंग यानी निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूलने की शिकायतों पर नियंत्रण करना है।

दरअसल, प्रीमियम शराब दुकानों में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बेचने की शिकायतें लगातार सामने आने की बात कही गई है। आबकारी विभाग अब ऐसी शिकायतों पर अंकुश लगाने के लिए भुगतान व्यवस्था को डिजिटल करने जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ग्राहक शराब की खरीद का भुगतान क्यूआर कोड सहित उपलब्ध डिजिटल माध्यमों से कर सकेंगे। इसके चलते प्रत्येक लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

विभाग का मानना है कि कैशलेस व्यवस्था लागू होने से शराब की बिक्री और भुगतान प्रक्रिया की निगरानी पहले की तुलना में आसान होगी। किसी ग्राहक से निर्धारित कीमत से अधिक राशि लिए जाने की शिकायत सामने आती है, तो डिजिटल भुगतान का रिकॉर्ड जांच में महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। इससे दुकान पर हुई वास्तविक बिक्री और ग्राहक से प्राप्त भुगतान के बीच अंतर की जांच करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

नई व्यवस्था खास तौर पर प्रीमियम शराब दुकानों पर लागू की जा रही है। प्रदेश में संचालित सभी 49 प्रीमियम दुकानों में 1 अक्टूबर से कैशलेस बिक्री की व्यवस्था शुरू होगी। इसका मतलब यह है कि इन दुकानों पर ग्राहक को शराब खरीदने के लिए नकद राशि देने के बजाय डिजिटल भुगतान करना होगा। भुगतान प्रक्रिया में क्यूआर कोड जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे लेनदेन का रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा।

आबकारी विभाग के इस फैसले को शराब दुकानों में होने वाले वित्तीय लेनदेन को डिजिटल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। डिजिटल भुगतान से ग्राहक के पास भी भुगतान का प्रमाण रहेगा और विभाग के पास लेनदेन की जानकारी उपलब्ध होगी। ऐसे में ओवररेटिंग से जुड़ी शिकायतों की जांच में रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है। विभाग को उम्मीद है कि इससे निर्धारित मूल्य और वास्तविक भुगतान के बीच होने वाले संभावित अंतर पर निगरानी मजबूत होगी।

विभाग की ओर से जारी व्यवस्था का सीधा असर प्रीमियम शराब दुकानों से खरीदारी करने वाले ग्राहकों पर पड़ेगा। 1 अक्टूबर से उन्हें नकद भुगतान के बजाय डिजिटल माध्यम का उपयोग करना होगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कैशलेस भुगतान के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सभी माध्यमों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था भी डिजिटल लेनदेन के रिकॉर्ड पर अधिक केंद्रित होगी। ओवररेटिंग की शिकायत मिलने पर संबंधित दुकान के भुगतान रिकॉर्ड की जांच की जा सकेगी। इस तरह सरकार का उद्देश्य शराब बिक्री में पारदर्शिता बढ़ाना और निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूलने की शिकायतों को नियंत्रित करना है। 1 अक्टूबर से लागू होने वाला यह बदलाव प्रदेश की 49 प्रीमियम शराब दुकानों में खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए नई भुगतान व्यवस्था लेकर आएगा।