शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्होंने आर्थिक जरूरत के चलते अपना सोना नगर के एक ज्वेलर्स के यहां गिरवी रखा था। उनका कहना है कि गिरवी रखे गए सोने की कुल मात्रा करीब साढ़े 8 तोला है। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि उन्होंने अब तक करीब 30 हजार रुपये ब्याज के रूप में जमा किए हैं। इसके अलावा गिरवी रखे सोने को छुड़ाने के लिए आवश्यक रकम की व्यवस्था करने की बात भी शिकायतकर्ताओं की ओर से कही गई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि रकम और ब्याज की व्यवस्था करने के बाद भी उन्हें उनका गिरवी रखा सोना वापस नहीं मिला। उनका कहना है कि वे कई बार ज्वेलर्स की दुकान पर जाकर सोना वापस मांग चुके हैं, लेकिन अब तक उन्हें सोना नहीं दिया गया। इस मामले को लेकर उन्होंने अब पुलिस से हस्तक्षेप करते हुए जांच की मांग की है।
शिकायत में यह भी बताया गया है कि सोने से संबंधित बिल ज्वेलर्स के पास ही रखा हुआ है। ऐसे में पुलिस के लिए गिरवी रखने के समय तैयार किए गए दस्तावेज, बिल, भुगतान की जानकारी और ज्वेलर्स के रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी। पुलिस यह भी देख सकती है कि सोना किस शर्त पर गिरवी रखा गया था और शिकायतकर्ताओं की ओर से किए गए भुगतान का संबंधित रिकॉर्ड क्या है।
मामला थाने पहुंचने के बाद अब पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि गिरवी रखे गए सोने को वापस नहीं किए जाने की वास्तविक वजह क्या है। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अपना सोना वापस दिलाने की मांग की है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार मामले में शिकायत प्राप्त हो चुकी है और पुलिस स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
थाना प्रभारी मनीष सेनडे ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि पीड़िता को न्याय मिलेगा। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले की जांच करेगी। जांच के दौरान ज्वेलर्स के पास मौजूद रिकॉर्ड, गिरवी लेनदेन से संबंधित जानकारी और भुगतान के दावों की भी पड़ताल की जा सकती है।
गुंडरदेही में सामने आए इस मामले ने गिरवी रखे गए आभूषणों से जुड़े लेनदेन में दस्तावेज और भुगतान रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के महत्व को भी सामने ला दिया है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पीड़ित पक्ष ने पुलिस से अपने साढ़े 8 तोला सोने को लेकर न्याय और उचित कार्रवाई की मांग की है।