जिनपिंग-मोदी मुलाकात का असर? LAC पर PLA की तैनाती में कमी, डि-एस्केलेशन की दिशा में बढ़ा चीन

रक्षा मंत्रालय की 2025-26 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत से लगी उत्तरी सीमा पर चीनी PLA की तैनाती में उल्लेखनीय कमी आई है। रिपोर्ट में भारत-चीन के राजनीतिक, कूटनीतिक और सैन्य संपर्कों के सकारात्मक असर का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि LAC पर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और डि-इंडक्शन की प्रक्रिया अभी बाकी बताई गई है।

Sep 14, 2026 - 12:31
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जिनपिंग-मोदी मुलाकात का असर? LAC पर PLA की तैनाती में कमी, डि-एस्केलेशन की दिशा में बढ़ा चीन

UNITED NEWS OF ASIA. भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। रक्षा मंत्रालय की 2025-26 की सालाना रिपोर्ट में भारत से लगी उत्तरी सीमा के सामने चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA की तैनाती में उल्लेखनीय कमी का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में भारत और चीन के बीच राजनीतिक, कूटनीतिक तथा सैन्य स्तर पर हुए संपर्कों के सकारात्मक असर की बात कही गई है। यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हालिया मुलाकात के बाद चर्चा में आया है।

रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2025 के दौरान उत्तरी सीमा के सामने चीनी सैनिकों की तैनाती में कमी देखी गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-चीन सीमा से जुड़े विभिन्न संवाद तंत्रों के कारण सीमा की स्थिति में स्थिरता आई है। इनमें वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन यानी WMCC और भारत-चीन सीमा मामलों के लिए विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत का भी उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों देशों के बीच लगातार राजनीतिक और सैन्य संपर्कों का असर उत्तरी सीमा की स्थिति पर पड़ा है। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की बैठक के लिए तियानजिन यात्रा का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार इन प्रयासों से सीमा पर शांति और स्थिरता कायम करने में मदद मिली है।

माना जा रहा है कि 2024 में डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया के बाद अब सीमा पर डि-एस्केलेशन की दिशा में भी प्रगति हुई है। डि-एस्केलेशन का मतलब सीमा पर आमने-सामने की स्थिति को कम करने के लिए सैनिकों की संख्या और सैन्य गतिविधियों में कमी करना है। हालांकि, पूरी प्रक्रिया का अगला चरण डि-इंडक्शन माना जाता है, जिसमें सैनिकों को अग्रिम क्षेत्रों से पीछे स्थित निर्धारित ठिकानों की ओर वापस भेजा जाता है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

LAC पर चीन की सैन्य मौजूदगी को लेकर रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि PLA की बड़ी संख्या अभी सीमा के नजदीक मौजूद ट्रेनिंग क्षेत्रों में रहती है। ऐसे इलाकों में तैनात सैनिक जरूरत पड़ने पर अपेक्षाकृत कम समय में LAC की ओर भेजे जा सकते हैं। यही वजह है कि भारतीय सेना चीन की ओर से डि-इंडक्शन की प्रक्रिया पर जोर दे रही है। भारत की ओर से सीमा के सभी सेक्टरों में सैन्य तैनाती को मजबूत और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार बताया गया है।

2020 में गलवान घाटी की झड़प के बाद भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव काफी बढ़ गया था। इसके बाद दोनों देशों ने सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत की। पूर्वी लद्दाख में डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव कम करने के प्रयास लगातार जारी रहे हैं। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट इन्हीं प्रयासों के व्यापक प्रभाव की ओर संकेत करती है।

हालांकि, सीमा पर स्थिति पूरी तरह सामान्य होने का दावा अभी नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट में चीन की सीमा के नजदीक मौजूद सैन्य क्षमता और ट्रेनिंग क्षेत्रों का भी उल्लेख है। इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी क्षेत्र में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हालिया फेस-ऑफ का भी जिक्र किया गया है, जहां गतिरोध खत्म करने के लिए कोर कमांडर स्तर की बैठकें हुई हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट भारत-चीन सीमा पर सैन्य तनाव को कम करने के लिए जारी प्रयासों को महत्वपूर्ण बताती है। PLA की तैनाती में कमी को डि-एस्केलेशन की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन सीमा पर स्थायी शांति के लिए डि-इंडक्शन और आगे की सैन्य एवं कूटनीतिक बातचीत महत्वपूर्ण बनी हुई है।