कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए ‘मिशन 2028’ के तहत युवा वोटर्स पर अपना फोकस बढ़ाया है। पार्टी की रणनीति में राहुल गांधी के माध्यम से प्रदेश के युवाओं से सीधे संवाद और उनकी समस्याओं को राजनीतिक मंच पर उठाना प्रमुख हिस्सा माना जा रहा है। इंदौर को इस आयोजन के लिए चुनने के पीछे शहर का बड़ा एजुकेशन हब होना महत्वपूर्ण कारण बताया जा रहा है। मालवा, निमाड़ और महाकौशल सहित प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा के लिए इंदौर आते हैं। ऐसे में कांग्रेस एक आयोजन के जरिए प्रदेश के व्यापक युवा वर्ग तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया ने कहा कि पार्टी युवाओं को जोड़ने और उनकी आवाज को बुलंद करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। कांग्रेस के लिए यह कार्यक्रम केवल एक छात्र सम्मेलन नहीं बल्कि संगठन और युवा मतदाताओं के बीच संपर्क मजबूत करने के अवसर के तौर पर भी देखा जा रहा है।
इंदौर का चयन मालवा-निमाड़ के राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश की राजनीति में इस क्षेत्र की विधानसभा सीटों को सत्ता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में मालवा-निमाड़ के कई जिलों में कांग्रेस का प्रदर्शन कमजोर रहा था। इंदौर में कार्यक्रम आयोजित कर कांग्रेस इस क्षेत्र में अपने संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। कार्यक्रम का संबंध प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के राजनीतिक क्षेत्र से भी जुड़ता है। इंदौर उनका गृह जिला है और प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल उनकी राउ विधानसभा क्षेत्र में आता है।
इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का गृह जिला धार भी इंदौर के नजदीक है। ऐसे में कांग्रेस के लिए इस आयोजन का महत्व केवल इंदौर तक सीमित नहीं माना जा रहा है। पार्टी की कोशिश मालवा-निमाड़ के साथ आसपास के क्षेत्रों के युवाओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी कार्यक्रम से जोड़ने की है। वहीं बीजेपी की ओर से पवन दुबे ने कांग्रेस की इस रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी राजनीतिक जमीन तलाशने के लिए इस तरह के आयोजनों का सहारा लेती रही है।
मालवा-निमाड़ क्षेत्र में कुल 66 विधानसभा सीटों का उल्लेख किया गया है। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 35 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को 28 और निर्दलीय उम्मीदवारों को 3 सीटें मिली थीं। 2023 में बीजेपी ने 48 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस 17 सीटों तक सिमट गई। एक सीट रतलाम की सैलाना से भारत आदिवासी पार्टी के खाते में गई। इन आंकड़ों के बीच कांग्रेस के सामने 2028 से पहले इस क्षेत्र में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की चुनौती है।
अब कांग्रेस की नजर राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर है। पार्टी को उम्मीद है कि इंदौर से शुरू होने वाला यह यूथ कनेक्ट अभियान संगठन में नई सक्रियता पैदा करेगा और मालवा-निमाड़ में कमजोर पड़े जनाधार को मजबूत करने में मदद करेगा। हालांकि इसका वास्तविक राजनीतिक असर आगामी चुनावी गतिविधियों और मतदाताओं के रुख से ही स्पष्ट होगा।